रमजान माह के चलते लाला बाजार में उमड़ी भीड़ का दृश्य।
– लाला बाजार व चूड़ी गली समेत अन्य प्रमुख बाजारों में उमड़े खरीददार
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। मुस्लिम समुदाय को रहमतों व बरकतों के महीना रमजान का बेसब्री से इंतजार रहता है। रमजान का माह कल (आज) से शुरू हो जाएगा। रमजान का महीना शुरू होने के चलते मुस्लिम बाहुल्य इलाकों की रौनक देखते ही बन रही है। शहर के लाला बाजार, चूड़ी गली समेत अन्य प्रमुख बाजार ग्राहकों से गुलजार हो गए हैं। खाद्य सामग्री के साथ-साथ अन्य जरूरत के सामानों की दुकानें भी सज गई हैं। जिनमें ग्राहकों की भीड़ देखी गई।
बताते चलें कि रमजान माह को बरकतों व रहमतों का महीना भी कहा जाता है, इस माह में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखने के साथ-साथ पांच वक्त की नमाज व तरावीह मुकम्मल तौर पर अदा करते हैं। बताया जाता है कि इस माह मंे एक नेकी के बदले सत्तर नेकियों का सवाब मिलता है और मुस्लिम समुदाय के लोग जकात भी अदा करते हैं। रमजान का चांद नजर आते ही मुस्लिम बाहुल्य इलाकों की रौनक बढ़ गई। बुधवार को सुबह से ही लाला बाजार, चूड़ी गली, चैक, चैगलिया समेत अन्य प्रमुख बाजार में ग्राहकों की भीड़ नजर आई। रमजान माह में बनने वाली अफतारी की तैयारी में लोग जुटे रहे। लाला बाजार में सजी सेंवई व सूतफेनी की दुकानों में ग्राहकों का सैलाब उमड़ पड़ा। इसके अलावा खजूर की भी जमकर बिक्री हुई। बाजार में तरबूज की भी आमद शुरू हो गई है, क्योंकि रमजान में रोजदार इस फल को बेहद पसंद करते हैं। तरबूज में अभी महंगाई की मार झलक रही है लेकिन धीरे-धीरे इसके दामों में गिरावट भी आएगी।
मस्जिदों में तरावीह का दौर शुरू
फतेहपुर। रमजान माह का चांद नजर आने से पहले ही मस्जिदों में साफ-सफाई का दौर शुरू हो गया था। मंगलवार व बुधवार को सभी मस्जिदों के जिम्मेदार साफ-सफाई में जुटे रहे और बुधवार की शाम तक सभी मस्जिदों को साफ-सुथरा कर दिया गया। मगरिब की नमाज के बाद लोगों ने चांद का दीदार किया और एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद पेश की, तत्पश्चात सभी लोग तरावीह की तैयारियों में जुट गए और इशा की नमाज के लिए लोग बड़ी संख्या में मस्जिदों की ओर जाते दिखाई दिए। रमजान माह में तरावीह सुनना सुन्नत-ए-मुअक्किदा कहा जाता है इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मस्जिद पहुंचते हैं। किसी मस्जिद में छह दिन तो किसी में सात, आठ तो किसी मस्जिद में पंद्रह दिन में पहला कुरआन मुकम्मल कराया जाता है। लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से तरावीह सुनने के लिए मस्जिदों में पहुंचे।
