फोटो परिचय-  कलेक्ट्रेट सभागार में निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा करतीं डीएम निधि गुप्ता वत्स।

– अलंकार योजना, ग्रामीण स्टेडियम और इनडोर स्टेडियम की प्रगति पर जताई नाराजगी

– सिडको का वेतन रोकने के साथ शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भेजने के निर्देश

CITY NEWS FATEHPUR

फतेहपुर(CNF)। जिले में करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के महात्मा गांधी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने एक-एक निर्माण परियोजना की प्रगति परखी। काम की रफ्तार संतोषजनक न मिलने पर कई कार्यदायी संस्थाओं को फटकार लगाते हुए जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक में 50 लाख रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन परियोजनाओं के साथ सीएमआईएस पोर्टल पर दर्ज लंबित और विलंबित कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करना संभव नहीं है, उनकी संशोधित समयसीमा मुख्यालय स्तर से स्वीकृत कराकर पोर्टल पर भी अपडेट कराई जाए।

सिडको की कार्यप्रणाली पर नाराजगी

प्रोजेक्ट अलंकार, बुढ़वा ग्रामीण स्टेडियम तथा राजकीय इंटर कॉलेज में प्रस्तावित इनडोर स्टेडियम की धीमी प्रगति ने डीएम को विशेष रूप से नाराज किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था सिडको की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए। साथ ही शासन स्तर पर कार्रवाई के लिए पत्राचार करने को कहा।

कई संस्थाओं के काम भी जांच के दायरे में

समीक्षा के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के मुख्यमंत्री अभ्युदय विद्यालय, कंप्यूटर लैब और शौचालय ब्लॉक के निर्माण की प्रगति देखी गई। इन कार्यों में यूपीसीएलडीएफ की स्थिति की भी समीक्षा हुई। मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कॉलेज और छात्रावास समेत अन्य निर्माण कार्यों में सीएनडीएस-55 की प्रगति पर भी चर्चा की गई।

इसी तरह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिला कारागार में टाइप-2 आवास और आईटीआई की आधुनिक कार्यशाला से जुड़े पैक्सफेड के कार्य तथा आईटीआई भवन निर्माण में यूपीपीसीएल की प्रगति भी परखी गई। धीमी रफ्तार वाले कार्यों पर डीएम ने संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

मौके पर निरीक्षण कर कमियां दूर कराने के निर्देश

डीएम ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनकी निगरानी में चल रही परियोजनाओं का नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण किया जाए। निरीक्षण के दौरान यदि निर्माण में कोई कमी सामने आती है तो उसे संबंधित कार्यदायी संस्था को लिखित रूप में उपलब्ध कराया जाए और निर्धारित समय में सुधार सुनिश्चित कराया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं को केवल कागजों पर आगे बढ़ाने के बजाय मौके पर उनकी वास्तविक प्रगति सुनिश्चित की जाए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर समझौता न हो और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही कार्य कराया जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना, अधिशासी अभियंता सिंचाई, अधिशासी अभियंता जल निगम शहरी, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कार्यदायी संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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