एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के नामांकन के एक दिन बाद आज इंडिया गठबंधन ने भी उपराष्ट्रपति चुनाव की जंग में अपनी औपचारिक एंट्री कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी ने गुरुवार को विपक्षी खेमे की ओर से नामांकन दाखिल किया।
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी मौजूद रहे।
नामांकन के मौके पर एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार, सपा सांसद राम गोपाल यादव, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा और शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत समेत गठबंधन के कई अन्य बड़े नेता भी उनके साथ खड़े दिखे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 160 सांसदों ने प्रस्तावक और समर्थक के रूप में हस्ताक्षर किए।
राधाकृष्णन से इस मामले में आगे निकले सुदर्शन रेड्डी दरअसल,
राधाकृष्णन ने लगभग 20 प्रस्तावकों और 20 समर्थकों की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था, जबकि रेड्डी के साथ करीब 160 सांसद प्रस्तावक और समर्थक के तौर पर खड़े दिखे। हालांकि संख्या का यह अंतर सिर्फ प्रतीकात्मक है, असली फैसला तो मतदान के दिन सांसदों की पसंद से ही तय होगा। निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन पत्रों की जांच की और रेड्डी को एक पावती पर्ची (Acknowledgement Slip) सौंपी। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी मतदान के पात्र होते हैं।
उपराष्ट्रपति पद के लिए कितना है बहुमत का आंकड़ा?
निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 781 है और बहुमत का आंकड़ा 391 है। सत्तारूढ़ एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है। सत्तारूढ़ दल को कम से कम 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है और वाईएसआरसीपी जैसी गैर-भारतीय ब्लॉक पार्टियां पहले ही राधाकृष्णन को समर्थन देने की घोषणा कर चुकी हैं।
उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कब है?
उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा। नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है। 22 अगस्त को नामांकन की जांच होगी, और 25 अगस्त को उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की अंतिम तिथि है।
उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत (Nominated) सांसद मिलकर करते हैं। इस चुनाव में आम जनता वोट नहीं देती। चुनाव का संचालन चुनाव आयोग करता है और इसमें गुप्त मतदान (Secret Ballot) होता है। जीतने वाले उम्मीदवार को साधारण बहुमत (Simple Majority) चाहिए यानी जितने वोट पड़ते हैं, उनमें सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार उपराष्ट्रपति बन जाता है।
