श्रीलंका के पास हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को डुबोए जाने के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में मारे गए एक नाविक ने अपने पिता को फोन पर बताया था कि अमेरिकी सेना ने जहाज छोड़ने के लिए क्रू को दो बार चेतावनी दी थी। यह जानकारी ईरान के उस आधिकारिक दावे को झुठलाती है, जिसमें कहा गया था कि हमला बिना किसी चेतावनी के किया गया था।

कमांडर और क्रू के बीच बहस

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चेतावनी मिलने के बाद क्रू के सदस्यों और युद्धपोत के कमांडर के बीच बहस हुई थी। नाविक जहाज छोड़ना चाहते थे, लेकिन कमांडर ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। बुधवार को हुए इस हमले में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का इस्तेमाल किया, जिसमें दर्जनों नाविकों की जान चली गई। श्रीलंका की नौसेना ने बचाव अभियान चलाकर 87 शव बरामद किए हैं और 32 लोगों को सुरक्षित बचाया है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐतिहासिक घटना

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले को शांत मौत करार दिया है। उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन के युद्धपोत को डुबोने के लिए पनडुब्बी का इस्तेमाल किया है। इस घटना से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है।

 

भारत के लिए क्यों है यह खबर अहम?

यह ईरानी युद्धपोत हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास मिलन 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल हुआ था। इस वजह से भारतीय रक्षा विशेषज्ञ भी इस पूरी घटना पर करीब से नजर रख रहे हैं।

बचे हुए नाविकों पर फंसा पेंच

इस बीच, एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने श्रीलंका सरकार से संपर्क किया है। अमेरिका ने श्रीलंका से आग्रह किया है कि वह बचाए गए 32 नाविकों और एक अन्य ईरानी जहाज IRIS बूशहर के 208 नाविकों को फिलहाल वापस ईरान न भेजे।

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