कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने जाते पेशनर्स।
प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कानून वापस लेने की मांग
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये नये पेंशन कानून केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम, 2025 का विरोध करते हुए संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति उप्र ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर नये कानून को पेंशरो का विरोधी बताते हुए वापस लिए जाने की मांग किया। बुधवार को संयुक्त पेंशर्स कल्याण समिति के बैनर तले पेंशरो ने संयोजक कालीशंकर श्रीवास्तव के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुचकर प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कानून वापस लिये जाने की मांग किया। डीएम को दिये ज्ञापन में बताया कि केंद्र सरकार ने पेंशन कानून को 25 मार्च 2025 से प्रभावी कर दिया गया है। जिसमे पेंशनर्स की सेवानिवृत्ति की तिथि को पेंशन पात्रता के निर्धारण का आधार बनाया जाएगा। जिसमे किसी केंद्रीय या अन्य वेतन आयोग के कार्यकाल से पूर्व सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स को उस वेतन आयोग की अनुशंसाओं के लाभ से वंचित होना पड़ेगा। पेंशन वृद्धि के लाभ से वंचित रह जाने के कारण आर्थिक क्षति होगी। बताया कि पूर्व में सर्वाेच्च न्यायालय की पाँच सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय में पेंशन को सामाजिक कल्याणकारी उपाय माना गया है जिसका उद्देश्य रिटायर हुए व्यक्तियों वृद्धावस्था में सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। अधिनियम के प्रावधानों से एक जनवरी 2026 से पूर्व सेवानिवृत हुए पेंशनर्स को आर्थिक क्षति होने की संभावना है। जबकि पूर्व में लागू हुए सातवें केंद्रीय वेतन आयोग जो एक जनवरी 2016 से पूर्व तथा उसके पश्चात सेवानिवृत्त पेंशनर्स को लाभ में शामिल किया गया था। उन्होंने पीएम से केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम, 2025 को वापस लिए जाने के लिए आवश्यक एवं त्वरित कदम उठाने की मांग किया। इस मौके पर रशीद अहमद, फूलचन्द्र सैनी, रामराज वर्मा, फहीम अहमद, मातादीन गुप्ता, गंगा सागर, देवेंद्र दीक्षित, सदाशिव पांडेय, देव नारायण, विशाल गुप्ता, रामविशाल, रमेश चन्द्र, रामधनी, कामता प्रसाद, सुरेश चंद्र अवस्थी, जागेश्वर लोधी, लालता प्रसाद गुप्ता, रतन लाल, कामता प्रसाद, श्रीपाल, गंगा राम, कृष्ण पाल सिंह आदि रहे।
