मीडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। लगातार जारी सैन्य हमलों के बीच अमेरिकी सेना को भी बड़ा नुकसान हुआ है। दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने खुलासा किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के दौरान कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका के भीतर ही इस युद्ध को लेकर सवाल उठने लगे हैं और कई सांसद ट्रंप प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। आखिर इस संघर्ष में अमेरिकी सेना को कितना नुकसान हुआ है और क्यों अब अमेरिका की राजनीति में इस युद्ध को लेकर बहस तेज हो गई है। दरअसल, पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पारेल ने बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 10 दिनों के दौरान 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। पारेल ने यह भी जानकारी दी कि इन सैनिकों में से अधिकांश को मामूली चोट आई आई थी और अधिकांश इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

 

8 सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका विशेष चिकित्सा दैखभाल के साथ इलाज किया जा रहा है। हालांकि पेंटागन ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि ये हमले किन जगहों पर हुए हैं।  इसी बीच इस युद्ध को लेकर अमेरिका की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। डेमोक्रेट नेताओं ने ऐसे संघर्ष को लेकर ट्रंप से रणनीति बताने की मांग की है। इन नेताओं ने कहा है कि सरकार की तरफ से युद्ध के उद्देश्य और इसकी सीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। इससे ये खतरा बढ़ सकता है कि इससे ये मिशन धीरे धीरे और बड़ा हो सकता है। जिससे विश्व स्तर पर लोगों का नुकसान पहुंच सकता है। अमेरिकी सांसदों ने ये भी चेतावनी दी है कि इस संघर्ष का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि इसका आर्थिक प्रभाव भी आम लोगों पर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल और गैस की ढुलाई में आई बाधाओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने कहा कि समस्या का मूल कारण वाशिंगटन की अस्थिरता पैदा करने वाली कार्रवाइयां हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी कर विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच मंगलवार रात फोन पर हुई वार्ता का विवरण प्रदान करते हुए यह बात कही। इसमें कहा गया है कि अराघची ने जयशंकर को पिछले 11 दिनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए अपराधों का विस्तृत विवरण प्रदान किया, जिसमें मीनाब शहर में बालिका विद्यालय पर मिसाइल हमला और उसके बाद नागरिक ठिकानों पर हमले शामिल हैं। अराघची ने ईरान की अखंडता की व्यापक रूप से रक्षा करने के ईरान के दृढ़ संकल्प पर जोर दिया। इसमें कहा गया है कि दोनों विदेश मंत्रियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही में आई बाधाओं से उपजे हालात पर भी चर्चा की।

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