गांव में भरा बाढ़ का पानी।
खड़ी फसल चौपट होने के साथ कृषि भूमि भी कटान की जद में
शिवराजपुर के कटरी क्षेत्र के कई गांव प्रभावित, किसानों ने मांगा मुआवजा
सर्वे कराकर नुकसान का आकलन और कटान रोकने के इंतजाम की मांग
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। मलवां विकासखंड की ग्राम पंचायत शिवराजपुर के अंतर्गत आने वाले मिश्रनखेड़ा, लालखेड़ा, बसंतखेड़ा, दुल्हीखेड़ा समेत कटरी क्षेत्र के कई गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ के तेज बहाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित होने के साथ ही कृषि भूमि में तेजी से हो रहे कटान ने किसानों के सामने भविष्य की खेती को लेकर भी संकट खड़ा कर दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ की धार कई खेतों में इतनी तेज है कि खेतों के बीच गहरे नाले जैसी स्थिति बन गई है। पानी के बहाव के साथ खेतों की मेड़ और उपजाऊ मिट्टी लगातार कटकर बह रही है। कई स्थानों पर देखते ही देखते कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा कटान की चपेट में आ चुका है। इससे किसानों को एक साथ फसल और जमीन दोनों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी का स्तर घटने के बाद भी कटान का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। तेज बहाव वाली जगहों पर मिट्टी लगातार खिसक रही है। यदि समय रहते कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि बाढ़ की भेंट चढ़ सकती है।
किसान वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बाढ़ के पानी ने खेतों की स्थिति बिगाड़ दी है। कई जगह उपजाऊ मिट्टी बह जाने से खेतों का स्वरूप तक बदल गया है। खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने के बाद अब जमीन के कटने से किसानों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है और मौसम की मार से किसान परेशान हैं। ऐसे में कृषि भूमि का कट जाना उनके लिए बड़ा नुकसान है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से प्रभावित गांवों का तत्काल स्थलीय सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सर्वे के दौरान फसल के साथ कृषि भूमि को हुए नुकसान को भी शामिल किया जाए और रिपोर्ट के आधार पर पात्र प्रभावित किसानों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि कटान प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर तत्काल सुरक्षा और बचाव के स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि बाढ़ के दौरान खेतों की जमीन को दोबारा नुकसान से बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि प्रशासन की समय रहते पहल से न केवल वर्तमान नुकसान का आकलन हो सकेगा, बल्कि भविष्य में कृषि भूमि के कटाव को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।
