एआई से तैयार दंपती की रेट्रो अंदाज वाली तस्वीर।
बेलबॉटम, बड़े कॉलर और पुराने हेयर स्टाइल की डिजिटल वापसी ने खींचा युवाओं का ध्यान
यादों को ताजा करने से लेकर 2027 की सियासी जमीन तलाशने तक, रेट्रो तस्वीरों ने बढ़ाई चर्चा
CIT NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। तकनीक जिस तेजी से दुनिया को भविष्य की ओर ले जा रही है, उसी दौर में सोशल मीडिया पर बीते जमाने की वापसी ने सभी का ध्यान खींच लिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के जरिए 1980 के दशक के फैशन, पहनावे और जीवनशैली को तस्वीरों में फिर से जीवंत किया जा रहा है। बड़े कॉलर की शर्ट, बेलबॉटम पैंट, जैकेट, लंबे बाल और पुराने दौर का खास अंदाज अब सड़कों पर कम, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर खूब नजर आ रहा है।
इस डिजिटल रेट्रो लहर की खास बात यह है कि इसमें केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि राजनीतिक चेहरों को भी पुराने अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है। एआई से तैयार तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट होते ही चर्चा का विषय बन रही हैं। पुरानी पीढ़ी इन तस्वीरों में अपने बीते दिनों की झलक देख रही है, जबकि युवाओं के लिए चार दशक पुराना फैशन नया, अलग और मनोरंजक कंटेंट बन गया है।
नई तकनीक, पुरानी यादों का मेल
एआई ने तस्वीरों को बदलने की प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया है कि किसी व्यक्ति के चेहरे और मौजूदा तस्वीर को एक खास दौर के माहौल में ढालना अब कुछ ही क्षणों का काम रह गया है। कपड़े, हेयर स्टाइल, बैकग्राउंड, रंग और तस्वीर का पूरा वातावरण किसी पुराने दशक जैसा बनाया जा सकता है।
लेकिन इस ट्रेंड की दिलचस्पी केवल तकनीकी चमत्कार में नहीं है। इसके पीछे लोगों का पुरानी यादों से जुड़ाव भी बड़ा कारण है। जिस दौर को आज की युवा पीढ़ी ने देखा तक नहीं, उसी दौर की तस्वीरें अब उसे सोशल मीडिया के जरिए आकर्षित कर रही हैं।
रेट्रो अंदाज में सियासी चेहरों की एंट्री
रेट्रो तस्वीरों में राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी ने इस ट्रेंड को एक नया आयाम दे दिया है। कभी राजनीति में पोस्टर, बैनर, दीवार लेखन, जनसभाएं और अखबार प्रचार के प्रमुख माध्यम हुआ करते थे। अब सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का अहम मंच बन चुका है।
ऐसे में किसी राजनीतिक चेहरे को पुराने दौर के परिधान और माहौल में दिखाना महज मनोरंजन है या मतदाताओं से जुड़ने का नया प्रयोग, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। एक तस्वीर जहां पुरानी पीढ़ी की भावनाओं को छू सकती है, वहीं युवाओं के बीच शेयर और चर्चा का जरिया भी बन सकती है।
2027 से पहले डिजिटल प्रयोगों की बढ़ी अहमियत
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक संवाद में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। अलग-अलग वर्गों के मतदाताओं तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दल और नेता नए-नए डिजिटल प्रयोग कर रहे हैं।
ऐसे माहौल में एआई से तैयार रेट्रो तस्वीरों को केवल फैशन ट्रेंड मानकर खारिज करना भी जल्दबाजी होगी। संभव है कि अभी यह प्रयोग मनोरंजन और यादों तक सीमित हो, लेकिन आने वाले समय में राजनीतिक संचार में ऐसे प्रयोगों का इस्तेमाल और बढ़े।
अतीत की तस्वीरों से भविष्य के मतदाताओं तक पहुंच
राजनीति में सिर्फ मुद्दे ही नहीं, भावनाएं और यादें भी लोगों को जोड़ती हैं। 80 का दशक देखने वाली पीढ़ी के लिए रेट्रो तस्वीरें बीते समय की यादें वापस लाती हैं, जबकि जेन-जी के लिए वही तस्वीरें एक अलग तरह की डिजिटल कहानी बन जाती हैं। यही दोहरा आकर्षण इस ट्रेंड को खास बनाता है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि एआई का रेट्रो ट्रेंड सीधे तौर पर चुनावी रणनीति का हिस्सा है। मगर इतना साफ है कि राजनीति का मैदान अब केवल भाषण और जनसभा तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर, वीडियो या छोटा-सा डिजिटल प्रयोग भी किसी चेहरे को चर्चा में ला सकता है।
सवाल यह नहीं कि अतीत क्यों लौटा, सवाल यह है कि किस मकसद से लौटा
चार दशक पहले का फैशन आज एआई के जरिए दोबारा सामने है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब बेलबॉटम और बड़े कॉलर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे और आज वही अंदाज डिजिटल तकनीक से दोबारा गढ़ा जा रहा है।
अब असली सवाल यह है कि यह रेट्रो लहर कुछ दिनों का सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर खत्म होगी या आने वाले चुनावी दौर में राजनीतिक संवाद का नया हथियार बनेगी। भविष्य के मतदाताओं को आकर्षित करने की दौड़ में सियासत अगर अतीत की तस्वीरों का सहारा ले रही है, तो शायद इसका कारण यही है कि पुरानी यादों को नई तकनीक की भाषा में पेश कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
