– जिला उद्यान अधिकारी ने आलू के अच्छे उत्पादन हेतु दी जानकारी
सिटी न्यूज़ फतेहपुर
फतेहपुर(CNF)। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में आलू के अच्छे उत्पादन हेतु समसामायिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण नितान्त आवश्यक है। आलू की फसल अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होती है। प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नम वातावरण में अगेती व पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है। फसल को भारी क्षति पहुंचती है। ऐसी परिस्थितियों में उद्यान विभाग द्वारा आलू उत्पादकों को सलाह दी जाती है कि आलू की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने हेतु रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
अगेती झुलसा रोग का प्रकोप निचली पत्तियों से प्रारम्भ होता है, जिसके फलस्वरूप गहरे भूरे/काले रंग के कुण्डलाकार छल्लेनुमा धब्बे बनते है, जो बाद में बीच में सूखकर टूट जाते हैं। प्रभावित निचली पत्तियों सूखकर गिर जाती है। इन धब्बों के बीच में कुण्डलाकार आकृति दिखाई देती है। पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल को विशेष क्षति होती हैं। इस रोग से पत्तियों सिरे से झुलसना प्रारम्भ होती हैं जो तीव्रगति से फैलती हैं और 2 से 4 दिनों के अन्दर ही सम्पूर्ण फसल नष्ट हो जाती है। बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आद्र्र वातावरण एवं कम तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। आलू टमाटर की फसल को अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए साफ व कगुबा (कोर्बेडाजिम 12 प्रतिशत, मैंकोजब 63 प्रतिशत डब्लयूपी) दवा का 2.5 से 3.0 ग्रा० प्रति ली० पानी मे घेलकर छिड़काव करें अथवा प्रोपिनेब 63 प्रतिशत डब्लयूपी दवा का 2.5 से 3.0 ग्रा० प्रति ली० पानी में घोलकर अथवा दोनो में से किसी एक दवा का 2 से 2.5 किग्रा० प्रति हे0 की दर से 800-1000 ली० पानी में घोलकर बनाकर छिड़काव किया जाए। आलू की फसल में माहू कीट के प्रकोप की स्थिति में नियंत्रण के लिए जैविक रूप से नीम का तेल 3.0 मिली प्रति ली० हल्के गरम पानी में घोलकर छिड़काव करें तथा रसायनिक नियंत्रण हेतु कीट नाशक जैसे थायक्लोप्रिंड 21.7 प्रतिशत एससी या फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी दवा का 0.5 मिली० प्रति ली० पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। जिन खेतो में पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप हा गया हो तो ऐसी स्थिति में रोकथाम के लिए अन्तः ग्राही (सिस्टेमिक) फफूंद नाशक मेटालेक्जिल युक्त रसायन 2.0 ग्र० प्रति ली० पानी में घोल बनाकर अथवा साईमेक्जेनिल फफूंद नाशक युक्त रसायन 3.0 ग्रा० प्रति ली० पानी में घेलकर प्रथम छिड़काव करें तथा 08 से 10 दिन बाद द्वितीय छिड़काव करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now