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फतेहपुर(CNF)। जनपद स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल से नियमों की अनदेखी का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के स्थापित मानदंडों को दरकिनार करते हुए एक रसूखदार व्यक्ति को पिछले दरवाजे से नियुक्ति प्रदान की है। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले के केंद्र में एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है, जिसे लेकर चर्चा है कि वह प्रदेश के एक उपमुख्यमंत्री का कथित रिश्तेदार है। सूत्रों का दावा है कि करीब दो माह पूर्व जब जिले में फार्मासिस्ट के पदों के लिए कोई भी आधिकारिक विज्ञप्ति या विज्ञापन जारी नहीं हुआ था, तब भी उक्त व्यक्ति को गुपचुप तरीके से कार्यभार सौंप दिया गया था। अब इस अवैध नियुक्ति को वैध बनाने के लिए वर्तमान में जारी भर्ती प्रक्रिया के तहत उसे समायोजित करने की योजना बनाई जा रही है। नियुक्तियों के अलावा, मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के आंतरिक प्रशासन में भी भारी अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि रसूख और आपसी सांठगांठ के चलते कुछ चहेते चिकित्सकों को मनचाही तैनाती दी जा रही है। इतना ही नहीं, ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें महत्वपूर्ण विभागों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जा रहा है, जिससे अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। भ्रष्टाचार की परतें यहीं नहीं रुकतीं; एक स्थानीय चिकित्सक पर मरीजों से अवैध वसूली और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से फर्जी रिपोर्ट तैयार करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अस्पताल के भीतर पनप रहे इस सिंडिकेट ने आम जनता के बीच प्रशासन की छवि को धूमिल किया है। जानकारों का मानना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की शासन स्तर से निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। फिलहाल, इस पूरे मामले ने मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब क्षेत्र की जनता और समाजसेवियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शासन इस भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करेगा, या सत्ता के संरक्षण में यह खेल इसी प्रकार चलता रहेगा।

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