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चैडगरा, फतेहपुर(CNF)। एक माह पूर्व सड़क दुर्घटना में घायल शिक्षामित्र की बीमारी के चलते बीती देर शाम हैलेट अस्पताल कानपुर में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शिक्षामित्र बृजेंद्र की मौत की खबर आसपास इलाके में आग की तरह फैल गई और इलाकाई लोगों का जमवाडा लगने लगा।
बता दें कि कल्यानपुर थाना क्षेत्र के गूंझी गांव निवासी बृजेंद्र कुमार शिक्षामित्र थे तथा पूर्व में सरकार द्वारा दी गई बीएलओ की जिम्मेदारी निभा रहे थे। बीती 11 फरवरी को ड्यूटी जाते समय बृजेंद्र एक आवारा मवेशी से टक्कर होने से घायल हो गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बृजेंद्र का हाथ टूट गया। परिजनों का आरोप है कि तब से बृजेंद्र को डॉक्टर ने आराम की सलाह दी थी। बृजेंद्र ने उच्चाधिकारियों से अवकाश हेतु प्रार्थना भी की थी लेकिन किसी भी अधिकारी ने बृजेंद्र की मजबूरी और चोट की परवाह नहीं की। जिस कारण वो अधिक दवाओं का सेवन कर करके जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे थे। छुट्टी न मिल पाने के कारण अधिक दवाओं के सेवन से बृजेंद्र की तबियत खराब हो गई। जिन्हें बीती नौ तारीख को हैलेट अस्पताल कानपुर नगर में भर्ती करवाया गया। जहां उपचार के चलते मंगलवार की शाम बृजेंद्र की सांसे थम गई। इधर घटना की खबर जैसे ही शासनिक व प्रशासनिक अमले को लगी तो तुरंत राजस्व व पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर शव का अंतिम संस्कार करवाने हेतु दबाव डालने लगे। उधर ग्रामीणों को जैसे ही प्रशासन द्वारा शव को उठाने के लिए लाई गई गाड़ी की सूचना लगी तो ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा। शव को उठने नहीं दिया। रात भर जद्दोजहद चली, राजस्व व पुलिस विभाग के आला अफसरो का आना-जाना लगा रहा लेकिन ग्रामीणों के आगे किसी की एक भी न चाली। सुबह पुनः सरकारी अमला गांव पहुंच शव को ले जाने के लिए दबाव बनाता रहा लेकिन मौके पर एकत्रित भीड़ ने किसी को भी पास नहीं भटकने दिया। दोपहर लगभग बारह बजे नायब तहसीलदार रचना यादव ने पीड़ित परिवार को शासन द्वारा मदद दिलवाने का आश्वासन दिया। शासन को पत्र भी लिखा जिसमें मुख्य बिंदु मृतक की पत्नी को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति मिलने, बच्चों की शिक्षा हेतु स्कॉलरशिप दिलवाने, बच्चों के भविष्य को देखते हुए 10-10 लाख की फिक्स डिपोजिट करवाई जाए, भूमिहीन परिवार को भरण पोषण हेतु भूमि आवंटित की जाए, तब जाकर ग्रामीणों ने शव को उठने दिया तथा पोस्टमार्टम हेतु भिजवाया।
पति चले गए, हमार लरिका अनाथ होईगा
पति के मौत की खबर सुनकर पत्नी शशिकला बेसुध हो गई। बार-बार चीख पुकार कर अपने पति की जान जाने के लिए शासन प्रशासन को दोषी ठहरती रही। एक ही शब्द बार-बार दोहराती रही कि पति चले गे, हमार लरिका अनाथ होई गें। बता दें कि बृजेंद्र के पिता बदलू 65 वर्षीय वृद्ध किसान है। मृतक बृजेंद्र चार भाई थे। जिसमें बृजेंद्र दूसरे नंबर के थे। अन्य भाई लालजी पाल बड़े भाई और सुनील व अनिल छोटे भाई रहे। बृजेंद्र की शादी 15 वर्ष पूर्व शशिकला के साथ हुई थी। मृतक बृजेंद्र के दो पुत्र ऋतिक पाल 12 वर्ष, नवनीत पाल 8 वर्ष है।
