CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। शनिवार को एक भीषण दुर्घटना होते-होते बच गई। फरिश्ता बनकर आ रहे महेश निषाद ने डूब रही चार महिलाओं को तो साड़ी खींच कर बचा लिया लेकिन उसका ध्यान एक बच्चे की तरफ जा पाया और वह डूब गया। उसकी मौत हो गई। अगर महेश निषाद अचानक नहीं पहुंच जाता तो गांव में पांच-पांच लाशें पड़ी होतीं। चारों तरफ कोहराम मचा होता। उधर बच्चे की मौत पर पारिवारिक जनों में रो-रो कर बुरा हाल रहा। इंस्पेक्टर सुल्तानपुर घोष तेज बहादुर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रधान अनूप सिंह तथा ग्रामीणों के सहयोग से जाल डालकर बच्चे का शव निकाला गया। सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के खरगूपुर बरगला ग्राम सभा के मजरे टंडवापर गंगा घाट में अमावस्या के दिन स्नान होता है। स्नान करने गईं चार महिलाएं और एक बच्चा गहरे पानी में चले गए। इजूरा खुर्द से पैदल टंडवापर गांव की तरफ आ रहे महेश निषाद ने देखा कि महिलाएं डूब रही हैं। उन्होंने साहस दिखाते हुए चारों महिलाओं की साड़ियां किसी तरह से पकड़ी और बाहर निकाल लिया लेकिन इस बीच 10 वर्षीय रत्नेश पुत्र राजू यादव की जानकारी उसे नहीं मिल पाई। बाद में महिलाओं ने बताया कि वह बच्चा साथ में था। महेश निषाद गंगा नदी में कूद कर उसे तलाशने लगा लेकिन मिला नहीं। इसके बाद ग्राम प्रधान अनूप सिंह और ग्रामीणों ने इंस्पेक्टर तेज बहादुर सिंह तथा पुलिस बल के साथ नदी में जाल डाला और बच्चे के शव को बरामद कर लिया। कुल मिलाकर अगर थोड़ी देर भी महेश निषाद का मौके पर आना नहीं होता तो शनिवार गांव के लिए काला दिवस बन जाता। साहस का परिचय देते हुए महेश निषाद ने जिस तरह चार महिलाओं को एक साथ डूबने से बचाया, उसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। प्रशासनिक स्तर पर भले न उसको नोटिस में लिया जाए लेकिन चार-चार महिलाओं को डूबने से बचाने वाले महेश निषाद को इस बात का गर्व है कि उसने चार लोगों की जान बचाई और दुख है कि वह बच्चे को नहीं बचा सका। आज हिंदी दैनिक महेश निषाद के साहस को सलाम करता है जिसने अपनी सूझबूझ एवं बहादुरी से मौत का तांडव होने से बचा लिया। उधर दस वर्षीय रत्नेश की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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