मुश्किल दौर से गुजर रहे अफगानिस्तान की मदद के लिए भारत एक बार फिर आगे आया है। भारत ने मानवीय सहायता के तहत काबुल को 5 टन जरूरी दवाइयों की खेप भेजी। यह कदम सिर्फ राहत सामग्री पहुंचाने तक सीमित नहीं है बल्कि दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्तों और भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें जिसमें पड़ोसी देशों के लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी जाती है। इससे पहले भी भारत ने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। हाल ही में भारत ने अफगान स्वास्थ्य अधिकारियों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की सौगात दी थी। इनमें नवजात और बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, वेंटिलेटर, मरीजों की निगरानी करने वाली मशीनें, कार्डियोग्राफ मशीन, प्लास्टिक सर्जरी किट और अन्य विशेष मेडिकल उपकरण शामिल थे। इन संसाधनों से अफगान अस्पतालों की क्षमता बढ़ने की उम्मीद थी। भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि उसकी प्राथमिकता अफगान की जनता है।
चाहे खाद्य सुरक्षा का सवाल हो, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो या फिर शिक्षा और कौशल विकास के पहलू। भारत ने हर स्तर पर अफगान लोगों का साथ निभाने की कोशिश की। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने साफ कहा है कि वह अफगान में शांति, स्थिरता और विकास के लिए सहयोग जारी रखेगा। दरअसल भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी हैं। दोनों देशों के संबंध सदियों पुराने हैं। पिछले दो दशकों में भारत ने अफगानिस्तान के विकास में अरबों डॉलर का निवेश किया। काबुल में संसद भवन का निर्माण, अफगान भारत मैत्रीबान, सड़कों और बिजली परियोजनाओं का विकास, अस्पताल और स्कूलों की स्थापना जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट भारत की साझेदारी की मिसाल थी। इसके अलावा हजारों अफगान छात्रों को भारत में पढ़ाई के लिए छात्रवधियां भी दी गई। यही वजह है कि अफगानिस्तान में भारत के प्रति सकारात्मक भावना आज भी दिखाई देती है। सत्ता परिवर्तन के बाद भी भारत ने अपने मानवीय सहयोग को जारी रखा और आम अफगान नागरिकों की मदद पहुंचाने का प्रयास किया। यहां पर एक और बात गौर करने वाली है।
लंबे समय तक अफगानिस्तान को अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखने वाला पाकिस्तान आज नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। आज तालिबान के साथ सीमा विवाद, सुरक्षा संबंधी मुद्दों और व्यापारिक बाधाओं को लेकर लगातार तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे में अफगानिस्तान अब व्यापार और संपर्क के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। और इसी रणनीति के तहत तालिबान भारत से करीबी चाहता है और भारत भी लगातार अफगान जनता की मदद करते आया। यहां पर एक और बड़ी बात है। भारत और ईरान के चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की कोशिशें अफगानिस्तान की इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
