1950 का वो दशक जब ड्रैगन ने चुपचाप भारत की जमीन पर कब्जा किया और उस वक्त के हुक्मरानों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वहां घास तक नहीं उगती। लेकिन आज उसी लद्दाख की उसी जमीन से भारत ने एक ऐसा जवाब दिया है कि चीन की बेचैनी इस वक्त आसमान छू रही है। 14,000 फीट की ऊंचाई जहां जमने वाला तापमान और ऑक्सीजन की कमी में मशीनें तक अपना दम तोड़ देती है, वहां भारत ने जमीन के सीने को चीर कर पाताल की अग्नि को कैद कर लिया है। यह सिर्फ बिजली बनाने का प्रोजेक्ट नहीं है। यह चीन के लिए एक बहुत बड़ा और एक कड़ा संदेश है। ओएनजीसी ने लद्दाख की पुंगा घाटी में दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई सफलतापूक पूरी कर ली है। 1000 मीटर की गहराई सिर्फ 1 महीने का समय और नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। यह कोई आम खुदाई नहीं है।

आपको बता दें कि जियोथर्मल एनर्जी यानी कि पृथ्वी के गर्भ में छिपी वो प्राकृतिक गर्मी जो सोलर और विंड की तरह मौसम की मोहताज नहीं है। यह 24 घंटे बिजली देगी। लद्दाख में चीन की सीमा के ठीक बगल में भारत अब अपनी खुद की एनर्जी ऑटोनॉमी कायम कर रहा है। यह दूसरा कुआं। आपको बता दें कि भारत के पहले 1 मेगावाट वाले जियोथर्मल पायलट पावर प्लांट का आधार बनेगा। पहले कुएं ने यह साबित कर दिया था कि पुंगा घाटी में उबलते तापमान वाली भाप है। अब दूसरा कुआं यह सुनिश्चित कर रहा है कि भारत का यह प्रोजेक्ट सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर चीन की नाक के नीचे मजबूती से खड़ा है। ड्रैगन को यह बात अब समझ लेनी चाहिए कि अब लद्दाख की उस जमीन को बंजर समझने की गलती वह दोबारा नहीं कर पाएगा। भारत का लक्ष्य है साल 2030 तक 500 गीगावाट नॉन फॉसिल फ्यूल बिजली का उत्पादन और लद्दाख में जियोथर्मल की यह सफलता उस रणनीति का गेम चेंजर है।

पहले तकनीकी और आर्थिक चुनौतियां थी। लेकिन आज का भारत संसाधनों का इस्तेमाल करना जानता है। लद्दाख का पुंगा क्षेत्र अब सिर्फ भू तापीय ऊर्जा का केंद्र नहीं बल्कि भारत की उस सामरिक मजबूती का प्रतीक बन चुका है जो यह बताती है कि हम बॉर्डर पर ना सिर्फ अपनी सुरक्षा कर सकते हैं बल्कि वहां विकास की नई परिभाषा भी लिख सकते हैं। चीन की साजिशों के जवाब में भारत ने अब जमीन के अंदर से शक्ति बटोरनी शुरू कर दी है। लद्दाख की यह आग जो पुंगा घाटी से निकल रही है, यह भविष्य में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। ड्रैगन चाहे जितनी साजिशें करे भारत अब रुकने वाला नहीं है। हम ना सिर्फ अपनी जमीन बचा रहे हैं बल्कि उसे अपनी ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत भी बना रहे हैं। यह भारत की वो साइलेंट पावर है जो चीन को बहुत भारी पड़ने वाली है।

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