ऊर्जा परिवर्तन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) सहायता योजना’ को मंजूरी दी है। इसके लिए पांच वर्षों में कुल 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के भविष्य को ऊर्जा देने वाली परिष्कृत सामग्रियों के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहने के जोखिम को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “क्या आपको लगता है कि हमारे भविष्य को ऊर्जा देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए? मुझे तो बिल्कुल नहीं लगता! लिथियम, निकेल, कोबाल्ट… ये सभी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी हैं। फिर भी, हम इन परिष्कृत सामग्रियों के आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए, मंत्रिमंडल ने एक नई योजना को मंजूरी दी है।” प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बताया कि इस योजना की मुख्य विशेषताएं हैं: नए महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र, निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सब्सिडी, घरेलू स्तर पर अधिक मूल्यवर्धन (value addition) और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला। उन्होंने कहा, “सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट है… भारत के पास भविष्य की तकनीकें विकसित करने की क्षमता होनी चाहिए!
कैबिनेट की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की प्रोसेसिंग अभी भी दुनिया के कुछ ही स्थानों तक सीमित है। इससे सप्लाई चेन पर भू-राजनीतिक व्यवधानों, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में रुकावटों का खतरा बना रहता है, जो सप्लाई चेन की मजबूती और आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। इसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संप्रभुता और डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) के लक्ष्यों को समय पर हासिल करने पर पड़ सकता है। वर्तमान में, लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है, क्योंकि देश में इनके शोधन (बेनिफिशिएशन) और प्रोसेसिंग का बुनियादी ढांचा अभी शुरुआती चरण में है। महत्वपूर्ण खनिजों के लिए घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता सीमित है; बड़े स्तर की परियोजनाओं को भारी पूंजी की जरूरत, उपयुक्त तकनीकों की कमी और कच्चे माल तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए, वैल्यू एडिशन को अधिकतम करने, आयात पर निर्भरता कम करने और एक मजबूत एंड-टू-एंड वैल्यू चेन बनाने के लिए घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता का विकास करना अत्यंत आवश्यक है।
घरेलू प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना और उन्हें चालू करने के लिए लक्षित पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से “महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए कैपेक्स सहायता योजना” तैयार की गई है। एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य भारत में घरेलू प्रसंस्करण क्षमताओं को विकसित करना है, ताकि देश के भीतर मूल्यवर्धन (value addition) को बढ़ावा मिल सके, आयात पर निर्भरता कम हो सके और वैल्यू चेन का विकास हो सके। यह योजना लिथियम और निकल अयस्कों/मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च-शुद्धता वाले यौगिकों में संसाधित करने पर केंद्रित है। निकल उत्पादन के उप-उत्पाद (by-product) के रूप में कोबाल्ट भी प्राप्त होने की उम्मीद है। इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, विशेष स्टील (speciality steel) आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा।
