दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और इंडिगो एयरलाइंस के संचालक इंटरग्लोब एविएशन को संशोधित उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) मानदंडों के तहत छूट देने के विमानन नियामक के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान, डीजीसीए ने न्यायालय को स्पष्ट रूप से सूचित किया कि किसी भी एयरलाइन के पायलटों के लिए अनिवार्य साप्ताहिक विश्राम में कोई छूट नहीं दी गई है। नियामक की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता अंजना गोसाईं ने कहा कि साप्ताहिक विश्राम की आवश्यकता पूरी तरह से लागू है और इसे न तो वापस लिया गया है और न ही इसमें कोई ढील दी गई है।

हालांकि, डीजीसीए और इंडिगो इस दावे का खंडन करते हुए कहते हैं कि एफडीटीएल नियमों को स्थगित नहीं रखा गया है और केवल विशिष्ट, समयबद्ध छूट दी गई हैं, जिसमें साप्ताहिक विश्राम जैसी मूलभूत सुरक्षा आवश्यकताओं को कम नहीं किया गया है। यह याचिका पूर्व विमान अभियंता सबरी रॉय लेंका, क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट (सीआरएम) प्रशिक्षक अमन मोंगा और सामाजिक कार्यकर्ता किरण सिंह ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एफडीटीएल व्यवस्था के तहत दी गई अस्थायी छूट भी यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालती है और डीजीसीए के पास अधिसूचित सुरक्षा नियमों को स्थगित करने या कमजोर करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।

उन्होंने एयरलाइनों द्वारा खुद को “कम लागत वाली एयरलाइन” के रूप में पेश करने की प्रथा को भी चुनौती दी है, उनका तर्क है कि मौजूदा विमानन कानूनों या नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के तहत इस तरह के वर्गीकरण की कोई वैधानिक परिभाषा या कानूनी मान्यता नहीं है।

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