भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सोमवार को हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। यह एफटीए भारत के 100 प्रतिशत निर्यात को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है। इसमें सभी टैरिफ लाइन यानी उत्पाद श्रेणियां शामिल हैं।

इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे पहले न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, मोटर वाहन व उसके कलपुर्जों जैसे भारतीय उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक का शुल्क लगाता था। अब बिना किसी शुल्क के बाजार पहुंच मिलने से भारतीय उत्पाद वहां अन्य देशों की वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।

समझौते के तहत भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं के कबाड़ जैसे कच्चे माल भी शुल्क-मुक्त मिलेंगे जिससे उत्पादन लागत घटेगी एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। दूसरी ओर, भारत ने 70.03 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों (जिसकी मूल्य के हिसाब से द्विपक्षीय व्यापार में 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है) पर शुल्क में रियायत देने की पेशकश की है जबकि 29.97 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों को संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बाहर रखा गया है। इन संवेदनशील उत्पादों में मुख्य रूप से दुग्ध (दूध, क्रीम, पनीर आदि), अन्य पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम), चीनी, कृत्रिम शहद, वसा एवं तेल, हथियार एवं गोला-बारूद, रत्न एवं आभूषण, तांबा और एल्युमिनियम से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।

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