बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर हलचल बढ़ती दिख रही है। इंडियन ओवरसीज बैंक के अधिकारियों के संगठन आईओबीओए ने 2 मार्च को एक दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यह कदम कथित तौर पर प्रबंधन द्वारा लागू की जा रही निगरानी व्यवस्था और कार्यस्थल की नई नीतियों के विरोध में उठाया गया है।

इस निर्णय को एआईबीओसी का भी समर्थन मिला है। महासंघ का कहना है कि हालिया घटनाक्रम कार्य संस्कृति में गंभीर और चिंताजनक बदलाव की ओर इशारा करता है। आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों को जबरन देर तक बैठने के लिए बाध्य किया जा रहा है, दिन खत्म होने पर एकतरफा प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और पेशेवर स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।

 

बता दें कि संगठन ने पहले भी कई बार प्रबंधन को ज्ञापन देकर मनोबल, मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत कामकाज पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि मौजूद जानकारी के अनुसार इन मुद्दों पर संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

 

संघ ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन की सूचना देने के बाद एसोसिएशन के दफ्तर को बंद कर दिया गया और पदाधिकारियों को प्रवेश से रोका गया, जिसे महासंघ ने ‘दमनात्मक’ कदम बताया है। बयान में कहा गया कि यह ट्रेड यूनियन अधिकारों और द्विपक्षीय औद्योगिक संबंधों की व्यवस्था पर सीधा हमला है।

 

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बैंक ने दिसंबर 2025 तिमाही में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। रिपोर्ट के मुताबिक शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और एनपीए जैसे परिसंपत्ति गुणवत्ता संकेतकों में सुधार देखने को मिला। संगठन का कहना है कि अधिकारियों की मेहनत के बावजूद भरोसे पर आधारित प्रशासन की जगह कठोर नियंत्रण लागू किए जा रहे हैं।

 

एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में मानवीय कार्य समय की बहाली, कुछ एचआर प्रावधानों की वापसी, पारदर्शी प्रशासन, पर्याप्त भर्ती और अवकाश स्वीकृति में कथित मनमानी रोक शामिल हैं।

 

आंदोलन की रूपरेखा के तहत 23 फरवरी को क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रदर्शन, 26 फरवरी को धरना और अंत में 2 मार्च को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की योजना बनाई गई है। बैंकिंग सेवाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल प्रबंधन और अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।

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