देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लि. का एकीकृत शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 6.45 प्रतिशत घटकर 3,659 करोड़ रुपये रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी (जनवरी-मार्च) तिमाही में उसे 3,911.1 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। कंपनी ने कहा कि शुद्ध लाभ में गिरावट मुख्य रूप से ‘मार्क-टू-मार्केट’ प्रभाव के कारण आई है। साथ ही गैर-परिचालन आय में कमी आई है जो बॉन्ड प्रतिफल में बदलाव के कारण है, जिसकी भरपाई बाद में की जा सकती है।

मार्क-टू-मार्केट परिसंपत्तियों की स्थितियों का मूल्यांकन करने की एक विधि है जो उनकी मूल खरीद कीमत के बजाय वर्तमान बाजार मूल्य पर आधारित होती है। यह वित्तीय स्थिति का वास्तविक समय में ‘उचित मूल्य’ की स्थिति प्रदान करती है। कंपनी ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि चाथी तिमाही में परिचालन आय 28.2 प्रतिशत बढ़कर 52,462.5 करोड़ रुपये हो गई जो 2024-25 की समान तिमाही में 40,920.1 करोड़ रुपये थी। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 48,125.3 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले इसी तिमाही में 37,585.5 करोड़ रुपये था।

कंपनी के अनुसार, चौथी तिमाही में शुद्ध बिक्री पहली बार 50,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई। उसने 6,76,209 इकाई की अब तक की सबसे अधिक तिमाही बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 11.8 प्रतिशत अधिक है। मारुति सुजुकी इंडिया ने बताया कि घरेलू बिक्री 5,38,994 इकाई रही और निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर 1,37,215 इकाई पर पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि निदेशक मंडल ने वर्ष के लिए 140 रुपये प्रति शेयर के रिकॉर्ड लाभांश की सिफारिश की है जबकि 2024-25 में यह 135 रुपये प्रति शेयर था।

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