पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कुछ ही दिनों के भीतर ईंधन के दाम बढ़ने से अब लोगों को डर सताने लगा है कि आने वाले दिनों में महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।

 

गौरतलब है कि महानगरों में कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पेट्रोल 96 पैसे महंगा होकर 109.70 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

 

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। उस समय पेट्रोल 3.29 रुपये और डीजल 3.11 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था।

 

मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इससे पहले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए थे। वहीं व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था।

 

19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत कोलकाता में 3202 रुपये तक पहुंच गई है। यह पहले 2208 रुपये थी। यानी एक साथ करीब 994 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से परिवहन और कारोबार की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। ऐसे में आम परिवारों का मासिक बजट और ज्यादा प्रभावित हो सकता हैं।

 

कोलकाता के न्यू गरिया इलाके में रहने वाले ऐप टैक्सी चालक सुमित दास ने बताया कि वह रोज लगभग 150 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं। पहले उनका मासिक डीजल खर्च करीब 25,500 रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 26,650 रुपये पहुंच जाएगा हैं।

 

सुमित दास का कहना है कि उनकी कमाई नहीं बढ़ रही, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता बेटी की पढ़ाई का खर्च है, क्योंकि अतिरिक्त ईंधन खर्च सीधे परिवार के बजट पर असर डाल रहा हैं।

 

वहीं बेहाला इलाके में फास्ट फूड दुकान पर काम करने वाले 50 वर्षीय मलॉय सरदार भी बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। वह रोल, मुगलई पराठा और तले हुए खाद्य पदार्थ बनाते हैं और उनकी मासिक तनख्वाह 13,500 रुपये हैं।

 

व्यावसायिक गैस सिलेंडर महंगा होने के बाद उनके मालिक ने वेतन कम करने की चेतावनी दी है। अब जून से उनकी तनख्वाह 13 हजार रुपये करने की बात कही गई हैं।

 

मलॉय सरदार का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं तो उनकी आय और घट सकती है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी भी कई घरों में खाना बनाने का काम करती हैं, लेकिन दो लोगों की कमाई के बावजूद परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा हैं।

 

इसी तरह कार किराये का कारोबार करने वाले संदीप कायल भी बढ़ती लागत से परेशान हैं। उनके पास चार गाड़ियां हैं, जिनमें तीन डीजल से चलती हैं। उन्होंने बताया कि पहले एक गाड़ी से हर महीने लगभग 4500 रुपये की बचत हो जाती थी, लेकिन अब ईंधन महंगा होने से यह कम होकर करीब 3300 रुपये रह जाएगी हैं।

 

आर्थिक जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, परिवहन, शिक्षा और छोटे कारोबार समेत लगभग हर क्षेत्र पर दिखाई देता हैं।

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