प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कारण रोजगार बाजार में संभावित व्यवधानों को लेकर युवाओं की आशंकाओं और चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इसे भविष्य की समस्या के बजाय “वर्तमान की आवश्यकता” के रूप में देख रही है। एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि मैं रोजगार बाजार में एआई-प्रेरित व्यवधानों को लेकर हमारे युवाओं की चिंताओं को समझता हूं। भय का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है। इसीलिए हम एआई-चालित भविष्य के लिए अपने लोगों को कौशल प्रदान करने और उन्हें नए कौशल सिखाने में निवेश कर रहे हैं। सरकार ने दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी कौशल विकास पहलों में से एक शुरू की है। हम इसे भविष्य की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सही कौशल और तैयारी के साथ, हमारे युवा भविष्य के कार्यक्षेत्र का नेतृत्व करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि एआई एक “शक्ति गुणक” है जो संभावनाओं की सीमाओं को और आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे डॉक्टर, वकील और शिक्षक भी लोगों के बड़े समूहों तक पहुँचने और उनकी मदद करने में सक्षम होंगे। इतिहास गवाह है कि प्रौद्योगिकी के कारण काम खत्म नहीं होता। इसका स्वरूप बदलता है और नए प्रकार के रोजगार सृजित होते हैं। कुछ रोजगारों की परिभाषा बदल सकती है, लेकिन डिजिटल परिवर्तन भारत की अर्थव्यवस्था में नए तकनीकी रोजगार भी जोड़ेगा। सदियों से यह आशंका रही है कि नवाचार और तकनीकी क्रांतियाँ रोजगारों को समाप्त कर देंगी। फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी नवाचार होता है, नए अवसर उत्पन्न होते हैं। एआई के युग में भी यही सच होगा।

भारत इस बदलाव के अनुकूल ढलने के लिए पहले से ही पूरी तरह से तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में भारत तीसरे स्थान पर रहा, जो एआई अनुसंधान एवं विकास, प्रतिभा और अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि को दर्शाता है। प्रधानमंत्री का कहना है कि नवाचार और समावेशन के संयोजन से एआई भारत के कार्यबल को सशक्त बनाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें विश्वास है कि एआई भारत के कार्यबल को सशक्त बनाएगा। सही कौशल और तैयारी के साथ, हमारे युवा कार्य जगत के भविष्य का नेतृत्व करेंगे।

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