रूस ने ईरान को लेकर कुछ ऐसा ही दावा किया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अस्थाई युद्ध विराम यानी सीज फायर की स्थिति बनी है। खबर है कि दोनों देश शांति समझौते को लेकर बातचीत शुरू करने वाले हैं। इससे क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी है। लेकिन हालात अभी भी पूरी तरीके से सामान्य नहीं है। इस बीच रूस की ओर से एक अहम और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मिद्वदेव ने कहा कि ईरान ने इस संघर्ष के दौरान अपनी असली ताकत दुनिया को दिखा दी। मिद्वदेव के अनुसार ईरान का सबसे बड़ा हथियार कोई पारंपरिक परमाणु बम नहीं है। उन्होंने कहा कि स्टेट ऑफ हार्मोस ही ईरान का नया परमाणु हथियार है। स्टेट ऑफ आर्मस दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से एक बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल की आपूर्ति और व्यापार गुजरता है। अगर इस मार्ग को बंद कर दिया जाए या उस पर नियंत्रण स्थापित कर लिया जाए तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

रूस का मानना है कि ईरान ने इस रणनीतिक स्थिति का प्रभाव इस्तेमाल किया और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या भविष्य के युद्ध में भौगोलिक और रणनीतिक स्थान पारंपरिक हथियारों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगे। सीजफायर के बावजूद ईरान का रुख सख्त बना हुआ है। ईरान ने साफ कर दिया है कि हॉर्मोस से गुजरने वाले जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी। यदि जहाज बिना अनुमति के गुजरते हैं तो उसके खिलाफ कड़ी कारवाई की जा सकती है। वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हार्मोंस को खुलवाने का प्रस्ताव भी रखा गया था। लेकिन रूस और चीन ने इसका विरोध किया जिससे यह मुद्दा और जटिल बन चुका है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे “बहुत अच्छा” कदम बताया। मैक्रों ने एक्स पर कहा कि यह समझौता क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक पहल है, लेकिन उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि लेबनान की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस सीजफायर में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पूरे क्षेत्र में व्यापक और स्थायी शांति स्थापित की जा सके। जर्मनी ने भी सीजफायर का स्वागत किया है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों के जरिए जंग का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का स्वागत किया। साथ ही अमेरिका को सलाह दी कि उसे इसी तरह रूस को भी यूक्रेन के खिलाफ हमले रोकने के लिए मजबूर करना चाहिए।

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