इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि हमने फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर, हाल ही में अमेरिका और ईरान द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया है। सभी मध्यस्थों, और विशेष रूप से कतर और पाकिस्तान को, जिन्होंने इस समझौते को संभव बनाया, हार्दिक धन्यवाद। यह शांति का एक ऐसा अवसर है जिसे भुनाना चाहिए: इटली, पहले की तरह, एक व्यापक समझौते की दिशा में राजनयिक प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए तैयार है। ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता, और नौवहन की स्वतंत्रता की गारंटी दी जानी चाहिए। हम अन्य साझेदारों के साथ और आवश्यक संसदीय अनुमति के अधीन, होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्ण रूप से पुनः खुलने के साथ एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक उपस्थिति में योगदान देने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या समझौता हुआ है?
अमेरिका और ईरान शांति के एक शुरुआती समझौते (मेमोरेंडम) पर सहमत हुए हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते में तुरंत युद्धविराम और शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करना शामिल है। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों पर 60 दिनों तक बातचीत शुरू करने की योजना है। ईरान अंतिम समझौते तक परमाणु गतिविधियों को रोकने पर सहमत हो गया है, जबकि दोनों पक्षों ने प्रतिबंधों में संभावित राहत पर चर्चा की है। इस रूपरेखा का मकसद लेबनान में सैन्य अभियानों को रोकना भी है, हालांकि क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु भविष्य को लेकर मुख्य विवाद अभी भी अनसुलझे हैं।
UN ने US-Iran समझौते का स्वागत किया
यूएन के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र में संघर्ष खत्म करने और स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने सभी पक्षों से “अधिकतम संयम” बरतने और समझौते को ईमानदारी से लागू करने का आग्रह किया। टर्क ने लेबनान में जारी हिंसा पर भी चिंता जताई और लड़ाई को तुरंत रोकने, लेबनानी इलाके से इज़राइल की वापसी और सभी पक्षों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघन की जांच की मांग की।
