अमेरिका और ईरान में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश अपने मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमत हो गए हैं। इसी सिलसिले में क़तर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम बैठक होगी। जिसमें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी विवाद पर चर्चा की जाएगी। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका और ईरान ने फिलहाल सभी प्रकार की सैन्य कारवाही रोकने का फैसला किया है। अधिकारी के मुताबिक दोनों पक्ष तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि फिलहाल दोनों देश पीछे हटेंगे जिससे हॉर्मोन स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक और तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेगी। साथ ही समुद्री सुरक्षा और अन्य तकनीकी मुद्दों पर दोनों पक्षों में बातचीत होगी। अमेरिकी अधिकारियों और मामले से जुड़े तीसरे सूत्र ने भी मंगलवार को दोहा में होने वाली बैठक की पुष्टि की है। दरअसल पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया था। हालात तब और ज्यादा गंभीर हो गए जब होरमोस स्टेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए। अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और जवाबी कार्रवाही में ईरानी सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइटों और ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने का दावा किया। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिमी एशिया में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका गहरा गई थी।

तनाव बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चिंता होमोस स्ट्रेट को लेकर सामने आई है। यह जलडम फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों और खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों ने इस समुद्री मार्ग को खुला रखने पर जोर दिया। बढ़ते तनावों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। अब दोहा में होने वाली बैठक को तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।

बैठक में होम मजिस्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा, जहाजों के निर्वाद, आवाजाही, सैन्य गतिविधियों पर नियंत्रण और भविष्य में किसी भी टकराव को रोकने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि अभी तक ईरान की ओर से इस समझौते को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। जानकार मानते हैं कि अगर दोहा वार्ता सकारात्मक रहती है और दोनों देश अपने वादों पर कायम रहते हैं तो पश्चिमी एशिया में हालिया तनाव कम हो सकता है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी राहत मिल सकती है। हालांकि बातचीत का अंतिम परिणाम दोनों देशों की आगे की राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक हॉर्मोस्ट क्रेट को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरावची ने रविवार को कहा कि अगले 30 दिनों तक हॉर्मोस्ट क्रेट पूरी तरह ईरान की निगरानी और प्रबंधन में रहेगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि किसी दूसरे देश ने इस मामले में दखल देने की या एक तरफा कारवाई करने की कोशिश की तो जलमार्ग पूरी तरीके से सामान्य स्थिति में बहाल करने में और अधिक समय लगेगा।

बगदाद में अपने इराकी समकक्ष के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राकची ने कहा अगले 30 दिनों तक होमू स्ट्रीट पूरी तरह इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के नियंत्रण में निगरानी और प्रबंधन में रहेगा। सभी बाधाओं को दूर किए जाने के बाद इस समुद्री मार्ग को उसकी पूरी क्षमता के साथ फिर से संचालित किया जाएगा। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक अराक्षी ने कहा कि होमू स्टेट की सुरक्षा और संचालन पूरी तरह ईरान की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने बयान में कहा इस मामले में किसी दूसरे देश या फिर पक्ष की भूमिका नहीं है। यह व्यवस्था मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत पूरी तरह साफ है। किसी भी प्रकार की बाहरी दखल अंदाजी एक तरफा कारवाई ना केवल हालात को और बिगाड़ेगी बल्कि स्टेट को दोबारा पूरी तरह खोलने की प्रक्रिया में भी देरी करेगी। विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे वक्त में आया जब हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव काफी तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच जवाबी कार्यवाही और सैन्य गतिविधियों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल बन चुका है। ऐसे में खुरमु स्टेट को लेकर दिया गया यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खुर्मू स्टेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है।

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