पश्चिम एशिया संकट पर संसद में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी बैठक में उपस्थित हैं। अन्य दलों के नेता, जिनमें बीजेडी के सस्मित पात्रा, जेडीयू के लल्लन सिंह, मुकुल वासनिक, सपा के तारिक अनवर, धर्मेंद्र यादव और सीपीआईएम के जॉन ब्रिटास शामिल हैं, भी बैठक में पहुंच चुके हैं।

इस चर्चा का केंद्र बिंदु भारत पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव हैं, जिनमें तेल आपूर्ति, आवश्यक सेवाएं और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं। कई राजनीतिक दल बैठक में भाग ले रहे हैं, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं ने इसमें शामिल न होने का फैसला किया है, जो अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के समय में विदेश नीति पर उनके मतभेदों को दर्शाता है। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं और चर्चा के लिए कई दलों के नेता उपस्थित हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बैठक का बहिष्कार किया है, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 मार्च को कहा था कि केरल में एक निर्धारित कार्यक्रम के कारण वे बैठक में शामिल नहीं होंगे।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और भारत पर उनके प्रभाव के बारे में अधिक पारदर्शी होना चाहिए। बैठक में उपस्थित नेताओं में सस्मित पात्रा (बीजेडी), लल्लन सिंह और संजय झा (जेडीयू), तारिक अनवर और मुकुल वासनिक (कांग्रेस) और जॉन ब्रिटास (सीपीआई-एम) शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी बैठक स्थल पर पहुंच चुके हैं।

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