जहां चाह वहां राह और जब इरादे भारत जैसे मजबूत हो तो राह सिर्फ बनती नहीं इतिहास भी लिखती है। जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। तेल बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। पूरी दुनिया महंगाई के डर से कांप रही है। उसी समय भारत ने चुपचाप ऐसा कदम उठाया जिसने खेल बदल दिया। खबर आई उत्तर अफ्रीका के देश लीबिया से वही लीबिया जिसे अस्थिरता, गृह युद्ध और खतरे का इलाका माना जाता है। लेकिन इसी धरती पर भारत की सरकारी कंपनियों ने वो कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। भारत की कंपनियां ऑयल इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल ने लीबिया के गदा मिस बेसिन में बड़ी सफलता हासिल की। रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां छठे कुएं की ड्रिलिंग के दौरान बड़े तेल भंडार मिलने के संकेत हैं। अब जरा आप सोचिए जब दुनिया तेल के लिए परेशान थी तब भारत रेगिस्तान के नीचे अपना भविष्य तलाश रहा था। भारत आज अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल खरीदता है। इसका मतलब साफ है कि अगर दुनिया में युद्ध हो, सप्लाई रुके तो सीधा असर भारत की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल महंगा, डीजल महंगा और महंगाई तेजी से बढ़ जाती है। लेकिन इस बार भारत ने पहले से तैयारी कर रखी थी।

लीबिया का गदा मिस बेसिन तेल के लिए मशहूर माना जाता है। यहां का क्रूड ऑयल अच्छी क्वालिटी का बताया जाता है जिसे रिफाइन करना आसान होता है। अगर भारत को यहां स्थाई उत्पादन मिल गया तो यह सिर्फ व्यापार नहीं रणनीतिक जीत होगी क्योंकि इसका सीधा मतलब होगा भारत अब सिर्फ खरीददार नहीं रहेगा सबसे बड़ा खिलाड़ी बनेगा। दोस्तों, सबसे बड़ी बात यह है कि लीबिया जैसा देश आसान नहीं है। वहां राजनीतिक अस्थिरता है। अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। सुरक्षा चुनौतियां हैं। ऐसे माहौल में जाकर काम करना कोई साधारण बात नहीं है। लेकिन भारत ने वहां भरोसे का रिश्ता बनाया। भारत ने सिर्फ संसाधन नहीं देखे बल्कि साझेदारी का मॉडल अपनाया। यही वजह है कि भारतीय कंपनियों को वहां स्वीकारिता मिल गई। ऐसे में सवाल उठता है क्या इससे भारत में पेट्रोल सस्ता हो जाएगा? देखिए सीधा जवाब तो तुरंत नहीं है लेकिन लंबे समय में फायदा जरूर हो सकता है क्योंकि जब किसी देश के पास खुद के स्रोत बढ़ते हैं तो वैश्विक संकटों से कम प्रभावित होता है। सरकार के पास कीमतों को संभालने की ताकत बढ़ जाती है। यानी आज लीबिया में जो हो रहा है उसका असर कल आपकी जेब पर दिख सकता है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है।

भारत सिर्फ लीबिया तक सीमित नहीं है। रूस के सखालिन और साइबेरिया क्षेत्रों में भारतीय निवेश पहले से मौजूद हैं। मुंजाबिक के गैस प्रोजेक्ट हैं। ब्राजील और लैटिन अमेरिका में भी भारत मौके तलाश रहा है। यह एक बड़ी रणनीति है एनर्जी डायवर्सिफिकेशन की। मतलब अगर एक जगह संकट आ जाए तो दूसरे स्रोत चालू रहे। यही समझदार देशों की सबसे बड़ी पहचान होती है। आज दुनिया समझ रही है कि भारत सिर्फ बाजार नहीं है बल्कि भविष्य की ताकत है। और सोचिए अगर भारत तेल, गैस और रेयर अर्थ जैसे संसाधनों में मजबूत हो गया तो इसका असर सिर्फ अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा। राजनीति पर भी पड़ेगा। क्योंकि दुनिया में ताकत सिर्फ सेना से नहीं काम आती। ताकत आती है ऊर्जा से, ताकत आती है सप्लाई चेन से, ताकत आती है आत्मनिर्भरता से। कुछ रिपोर्ट में यह भी चर्चा हो रही कि लीबिया के कुछ इलाके में गैस और दुर्लभ खनिजों की संभावना भी हो सकती है। अगर भविष्य में ऐसा सच साबित हुआ तो भारत के लिए यह डबल जीत होगी।

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