केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर का दौरा किया और कहा कि देश से नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि मैं 31 मार्च, 2026 के बाद पहली बार बस्तर आया हूँ। यहाँ केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई। बस्तर के लोगों में उत्साह और भविष्य के प्रति आत्मविश्वास का माहौल हर जगह दिखाई दे रहा है। बस्तर का नक्सल मुक्त होना हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है।

अमित शाह ने कहा कि कई गैर-भाजपा सरकारों ने हमारे नक्सल मुक्त अभियान का समर्थन किया। लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने नक्सल मुक्त अभियान में हमारा साथ नहीं दिया। 13 दिसंबर, 2023 को यहाँ भाजपा सरकार बनने के तुरंत बाद, हमने बस्तर में बचे हुए नक्सलियों को निशाना बनाया। सुरक्षा बलों की वीरता, साहस और बलिदान के कारण, निर्धारित तिथि 31 मार्च, 2026 से पहले ही देश से नक्सलवाद का पूर्णतः उन्मूलन हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, हमारा लक्ष्य कौशल विकास के माध्यम से स्वरोजगार, शिक्षा के माध्यम से सरकारी नौकरियां, शिक्षा के माध्यम से निजी रोजगार और कौशल विकास के माध्यम से निजी रोजगार के अवसर पैदा करना है। साथ ही, सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों और महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है। यह एक प्रारंभिक कार्य योजना है। पहले चरण के पूरा होने के तुरंत बाद हम एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करेंगे।

 

उन्होंने कहा कि यहां लगभग 200 सुरक्षा शिविर स्थापित किए थे। सीआरपीएफ, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान इन शिविरों में रहकर क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे। लेकिन अब जब बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है, हमने निर्णय लिया है कि पहले चरण में इन 200 शिविरों में से 70 शिविरों, यानी लगभग एक तिहाई शिविरों को वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा में परिवर्तित किया जाएगा।

 

जगदलपुर में पहली बार केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे यादव और धामी का साय ने स्वागत किया। इस दौरान साय ने दोनों मुख्यमंत्रियों के साथ विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा भी की।

 

साय ने कहा कि बस्तर में पहली बार आयोजित हो रही यह उच्च स्तरीय बैठक क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। कभी नक्सली हिंसा की चुनौतियों से जूझने वाला बस्तर आज शांति, सुरक्षा और विकास की नयी पहचान गढ़ रहा है। ऐसे समय में देश के वरिष्ठ नेतृत्व और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि यह बैठक अंतरराज्यीय समन्वय को नयी मजबूती प्रदान करेगी तथा विकसित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बस्तर के निर्माण की दिशा में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाएगी।

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