हिंदी में अपील व समय सीमा बढ़ाने की उठी मांग
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। जीएसटी ट्रिब्यूनल में द्वितीय अपील दाखिल करने में आ रही तकनीकी बाधाओं और अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता को लेकर कर अधिवक्ता संस्थान की बैठक में अधिवक्ताओं ने गहरी नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था व्यापारियों और करदाताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है तथा सरकार को तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
अधिवक्ता लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिवक्ता माया पाण्डेय ने कहा कि ट्रिब्यूनल में द्वितीय अपीलें दाखिल करने के दौरान अनेक तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रथम अपील की तुलना में वर्तमान प्रक्रिया अधिक जटिल हैं। जिससे अधिवक्ताओं और व्यापारियों को अनावश्यक दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बैठक में अधिवक्ता सुधाकर अवस्थी ने सरकार की भाषा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर हिन्दी को बढ़ावा देने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर जीएसटी ट्रिब्यूनल में केवल अंग्रेजी भाषा में अपील दाखिल करने की बाध्यता लागू कर दी गई है। उन्होंने मांग की कि हिन्दी भाषी प्रदेश में ट्रिब्यूनल में हिन्दी भाषा में भी द्वितीय अपील स्वीकार की जाए, ताकि करदाताओं और अधिवक्ताओं को राहत मिल सके। संजीव अग्रवाल एडवोकेट ने कहा कि तकनीकी समस्याओं और प्रक्रिया संबंधी कठिनाइयों को देखते हुए अपील दाखिल करने की समय-सीमा में कम से कम तीन माह की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। इससे प्रभावित व्यापारियों को अपनी अपीलें समय से दाखिल करने का अवसर मिलेगा और न्याय पाने का उनका अधिकार सुरक्षित रहेगा। बैठक में अभय शंकर अवस्थी, मनीष मिश्रा, प्रवीण अवस्थी, सौरभ साहू, विपिन गुप्ता, राजीव मिश्रा, उन्नति मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने जीएसटी ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और हिन्दी-अनुकूल बनाने की मांग करते हुए सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की अपील की।
