श्यामलाल गुप्ता ‘पार्षद’ की जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण करते महासमिति के पदाधिकारी।
पार्षद की 131वीं जयंती पर प्रतिमा पर हुआ माल्यार्पण, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को किया नमन
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। अमर झंडा गीत के रचयिता एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री श्यामलाल गुप्ता ‘पार्षद’ की 131वीं जयंती बुधवार को भारतीय दोसर वैश्य महासमिति की ओर से श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पार्षद चौराहे स्थित उनकी प्रतिमा पर पदाधिकारियों ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेते हुए झंडा गीत को दोबारा पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग जोरदार ढंग से उठाई गई।
महासमिति के जिलाध्यक्ष नारायण बाबू गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि श्यामलाल गुप्ता ‘पार्षद’ का जीवन त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय मिसाल है। उन्होंने फतेहपुर को अपनी कर्मभूमि बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार गुप्ता ने कहा कि पार्षद जी ने शिक्षक की नौकरी छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। लंबे समय तक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती दी। आंदोलन में सक्रियता के चलते उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा और करीब दस वर्षों तक फरारी का जीवन भी बिताया।
महिला इकाई की जिलाध्यक्ष कविता गुप्ता ने कहा कि जिला कारागार की बैरक नंबर नौ में रहते हुए पार्षद जी ने लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने के उद्देश्य से झंडा गीत की रचना की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जन-जन में देशभक्ति का संचार करने का माध्यम बना।
महासमिति के संरक्षक राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1921 में पार्षद जी ने संकल्प लिया था कि जब तक देश आजाद नहीं होगा, तब तक वह नंगे पैर रहेंगे। उन्होंने अपने इस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। महामंत्री अमित गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1934 के हरिपुर कांग्रेस अधिवेशन में उनके रचित झंडा गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता मिली थी। बाद में 15 अगस्त 1952 को लाल किले से उन्होंने स्वयं झंडा गीत का गायन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे महान सेनानियों के संघर्ष से परिचित कराना जरूरी है। पार्षद जी के जीवन और कृतित्व को पाठ्यक्रम में शामिल करने के साथ ही उनके अमर झंडा गीत को भी पाठ्य पुस्तकों में स्थान मिलना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और देश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रति गौरव की भावना विकसित हो।
कार्यक्रम के अंत में मिष्ठान वितरित किया गया। इस मौके पर राम विशाल गुप्ता, संजय गुप्ता, मनीष गुप्ता, अरुण जायसवाल एडवोकेट, आनंद गुप्ता, विनायक जी, गुरु प्रसाद, अशोक गुप्ता, शौनक गुप्ता, रज्जन गुप्ता, दीपक कुमार, सुशील गुप्ता, दुर्गेश गुप्ता, प्रीतिजा गुप्ता, अनीता गुप्ता, सरोज गुप्ता, सीमा गुप्ता, जागृति गुप्ता, राजेश गुप्ता, मुकेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
