– 2.82 करोड़ खर्च होने के बाद भी यात्रियों को नहीं मिल रही पूरी सुविधा
– दूसरे डिपो की बसों का बस अड्डे में नियमित संचालन नहीं
CITY NEWS FATEHPUR
बिंदकी, फतेहपुर(CNF)। लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया बिंदकी का नया बस अड्डा अब यात्रियों की राह देख रहा है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित परिसर तैयार होने के बावजूद बसों का संचालन पूरी तरह बस अड्डे में स्थानांतरित नहीं हो सका है। खासकर बांदा समेत अन्य डिपो की बसें अब भी गांधी चौराहे पर ही रुककर यात्रियों को बैठाने और उतारने का काम कर रही हैं।
करीब 2.82 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से बस अड्डे को विकसित किया गया था। उद्देश्य था कि विभिन्न रूटों की बसें एक ही परिसर से संचालित हों और यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार न करना पड़े। लेकिन मौजूदा स्थिति में यह उद्देश्य पूरी तरह हासिल होता नजर नहीं आ रहा है।
फतेहपुर डिपो की बसों की आवाजाही बस अड्डे में दिखाई देती है, लेकिन दूसरे डिपो की बसों का नियमित रूप से परिसर में न आना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। बांदा और अन्य रूटों के यात्री आज भी गांधी चौराहे पर पहुंचकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। सड़क किनारे बसों के रुकने से यात्रियों को असुविधा के साथ यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
चौराहे पर भीड़, बस अड्डे में सन्नाटा
सुबह से शाम तक गांधी चौराहे पर यात्रियों की भीड़ दिखाई देती है। बस के आते ही सड़क किनारे खड़े यात्री उसमें सवार होते हैं। दूसरी ओर, जिस बस अड्डे को यात्रियों की सुविधा और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था का केंद्र बनाया गया, वहां अपेक्षित चहल-पहल नजर नहीं आती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नया बस अड्डा तैयार हो चुका है तो सभी रूटों की बसों को वहीं से संचालित कराया जाना चाहिए। इससे यात्रियों को एक स्थान पर सभी रूट की बसें मिल सकेंगी और मुख्य चौराहे पर लगने वाला जाम भी कम हो सकता है।
निजी वाहनों का बढ़ रहा जमावड़ा
बसों की सीमित आवाजाही के चलते शाम के समय बस अड्डे परिसर में निजी वाहनों की मौजूदगी बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परिसर में रोडवेज बसों की कतार और यात्रियों की भीड़ दिखाई देनी चाहिए, वहां अपेक्षाकृत सन्नाटा रहता है।
नए बस अड्डे को लेकर लोगों की उम्मीद सिर्फ खूबसूरत इमारत तक सीमित नहीं थी। लोगों को भरोसा था कि यहां से सभी प्रमुख रूटों की बसें मिलेंगी और सफर पहले से ज्यादा सुविधाजनक होगा। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग दूसरे डिपो की बसों का संचालन भी नियमित रूप से बस अड्डे से सुनिश्चित कराए, ताकि करोड़ों रुपये की परियोजना का वास्तविक लाभ यात्रियों को मिल सके।
