भाऊपुर गांव में मनरेगा कार्यों की जांच करती टीम।
फर्जी जॉबकार्ड और कागजों में काम दिखाकर भुगतान कराने के आरोप, जांच में अब तक 20 ग्रामीणों के बयान दर्ज
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। मलवां विकासखंड की ग्राम पंचायत भाऊपुर में मनरेगा के कार्यों में 42 लाख 43 हजार रुपये के कथित घोटाले की शिकायत के बाद जांच तेज हो गई है। ग्राम प्रधान गंगाप्रसाद उर्फ केशव तिवारी पर मनरेगा कार्यों में अनियमितता बरतने, फर्जी भुगतान कराने और अपात्र लोगों के नाम जॉबकार्ड बनवाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के बाद ब्लॉक स्तर पर गठित तीन सदस्यीय टीम गांव पहुंचकर अभिलेखों के साथ मौके पर कार्यों का सत्यापन कर रही है।
बुधवार को जांच टीम ने गांव में पहुंचकर मनरेगा मजदूरों के बयान दर्ज किए। इस दौरान शिवा, भइया लाल, ओम नारायण, नीलम, गंगाराम और राजरानी से पूछताछ की गई। अधिकारियों के अनुसार प्रकरण में कुल 59 लोगों के बयान दर्ज किए जाने हैं। अब तक जांच के तीन दौर में 20 ग्रामीणों के बयान दर्ज हो चुके हैं। पूरे मामले की 10 बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
ग्रामीण रज्जन सिंह उर्फ रावेन्द्र सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी को शपथपत्र के साथ शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत में मनरेगा के नौ कार्यों में कथित तौर पर फर्जी भुगतान का आरोप लगाया है। शिकायत में हरिशंकर के खेत से साई बॉर्डर तक मिट्टी पुराई, गाटा संख्या 1077 स्थित चारागाह में मेड़बंदी, नाली निर्माण और इंटरलॉकिंग समेत कई कार्यों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ कार्यों को अभिलेखों में दर्शाकर भुगतान कराया गया, जबकि मौके पर उनकी वास्तविकता और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
70-80 वर्ष के बुजुर्गों से लेकर बाहर नौकरी करने वालों के नाम जॉबकार्ड का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप मनरेगा जॉबकार्ड को लेकर लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक ग्राम पंचायत में ऐसे लोगों के नाम भी जॉबकार्ड में दर्ज हैं, जिन्होंने मनरेगा में काम ही नहीं किया। आरोप है कि प्रधान के रिश्तेदारों के अलावा 70 से 80 वर्ष तक के बुजुर्गों और बुजुर्ग महिलाओं के नाम भी जॉबकार्ड में शामिल किए गए। वहीं दिल्ली, कानपुर और गुजरात में नौकरी करने वाले लोगों, विकलांग पेंशनधारकों, भागवताचार्य और विदेश में रहने वाले व्यक्ति के नाम तक जॉबकार्ड में दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि ग्राम पंचायत के करीब 90 प्रतिशत जॉबकार्ड धारकों ने मौके पर मनरेगा कार्य नहीं किया, इसके बावजूद उनके नाम से मजदूरी का भुगतान कराया गया। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच टीम अभिलेखों व मौके के सत्यापन के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाने में जुटी है।
जॉबकार्ड से मस्टररोल तक होगी पड़ताल
ग्रामीणों ने पूर्व में हुई जांच को लेकर भी सवाल उठाते हुए इस बार निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सभी जॉबकार्ड धारकों को मूल जॉबकार्ड के साथ बुलाकर उनका भौतिक सत्यापन कराया जाए। ग्रामीणों ने जांच के दौरान विवाद की आशंका जताते हुए पुलिस बल की मौजूदगी में सत्यापन कराने की मांग भी की है।
जांच टीम अब जॉबकार्ड, मस्टररोल, मजदूरी भुगतान, बैंक खातों से संबंधित विवरण, कार्यस्थल और ग्राम पंचायत के अभिलेखों का मिलान कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन लोगों के नाम से मजदूरी का भुगतान हुआ, उन्होंने वास्तव में संबंधित कार्यों में श्रम किया था या नहीं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में फर्जी जॉबकार्ड, फर्जी भुगतान अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल 42.43 लाख रुपये के कथित मनरेगा घोटाले की जांच ने ग्राम पंचायत में हलचल बढ़ा दी है और ग्रामीणों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
