लेखक :- डॉ. देव राज सिंह
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आज इंसान सफलता की दौड़ में लगातार आगे बढ़ना चाहता है। बेहतर घर, अच्छी नौकरी, कारोबार, पैसा और सुविधाएं उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। लेकिन इस दौड़ में सबसे जरूरी चीज पीछे छूटती जा रही है—स्वास्थ्य। विडंबना यह है कि जिस शरीर और दिमाग के सहारे हम जीवन की सारी उपलब्धियां हासिल करना चाहते हैं, उसी की देखभाल के लिए हमारे पास समय नहीं है।
स्वास्थ्य खराब होने के बाद व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताओं का एहसास होता है। अस्पताल के बिस्तर पर पहुंचने के बाद अक्सर समझ आता है कि जिस धन को कमाने के लिए दिन-रात मेहनत की, उसे वापस स्वास्थ्य पाने में खर्च करना पड़ रहा है। इसलिए स्वास्थ्य को बीमारी आने के बाद याद करने के बजाय स्वस्थ रहते हुए उसकी रक्षा करना जरूरी है।
बदलती जीवनशैली बन रही चुनौती
आज की जीवनशैली ने हमारी आदतों को तेजी से बदला है। घंटों मोबाइल और कंप्यूटर पर बैठे रहना, पैदल चलने की आदत कम होना, देर रात तक जागना, सुबह समय पर न उठना और खान-पान में लापरवाही आम होती जा रही है। बाहर का तला-भुना भोजन, अत्यधिक मीठा और नमकीन खाद्य पदार्थ तथा असंतुलित खान-पान शरीर पर धीरे-धीरे असर डालते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन आदतों का असर केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। युवा और बच्चे भी शारीरिक सक्रियता की कमी और अनियमित दिनचर्या से प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए परिवार में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पैदा करना समय की आवश्यकता है।
स्वस्थ रहने के लिए बड़ी नहीं, अच्छी आदतें चाहिए
स्वस्थ जीवन के लिए हमेशा महंगे साधनों की जरूरत नहीं होती। नियमित पैदल चलना, योग या व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना, स्वच्छ पानी पीना और संतुलित भोजन करना जैसी साधारण आदतें भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।
भोजन हमारी सेहत का आधार है। हमें स्वाद के साथ-साथ पौष्टिकता पर भी ध्यान देना चाहिए। स्थानीय और ताजा खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना, फल-सब्जियों का पर्याप्त सेवन करना और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन को सीमित करना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य को भी मिले बराबर महत्व
स्वास्थ्य की चर्चा केवल शरीर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आज तनाव, चिंता, अकेलापन और लगातार मानसिक दबाव भी जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। काम का दबाव हो या पारिवारिक जिम्मेदारियां, हर व्यक्ति को अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी समय निकालना चाहिए।
परिवार से बातचीत, मित्रों के साथ समय, पर्याप्त आराम, अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का हिस्सा है। मानसिक परेशानी को कमजोरी समझना समस्या को और बढ़ा सकता है।
बीमारी का इलाज ही नहीं, बचाव भी जरूरी
स्वास्थ्य व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन व्यक्ति की अपनी जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता, आवश्यक टीकाकरण और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देने से कई समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
किसी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना अधिक सुरक्षित है। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी उपयोगी हो सकती है, लेकिन वह व्यक्तिगत चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं है।
स्वस्थ समाज की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं है। साफ पानी, स्वच्छ वातावरण, पौष्टिक भोजन, प्रदूषण पर नियंत्रण, कचरे का उचित निस्तारण और लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है।
स्कूलों में बच्चों को केवल किताबों की शिक्षा नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी भी दी जानी चाहिए। परिवारों को भोजन और दिनचर्या के प्रति जागरूक होना चाहिए तथा समाज को स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी अभियानों में भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
स्वास्थ्य को खर्च नहीं, निवेश समझें
हम अक्सर मोबाइल, वाहन, घर और दूसरी सुविधाओं पर पैसा खर्च करने को जरूरी मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए समय निकालना भूल जाते हैं। सच्चाई यह है कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के बिना कोई भी उपलब्धि लंबे समय तक खुशी नहीं दे सकती।
इसलिए आज से ही अपनी दिनचर्या में छोटे लेकिन सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। समय पर सोना, संतुलित भोजन करना, रोज कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना, तनाव को नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना—ये छोटे कदम भविष्य में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
अंततः जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बैंक खाते में नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और बेहतर जीवन जीने की क्षमता में होती है। पैसा कमाने के लिए जिंदगी को मत गंवाइए; जिंदगी को स्वस्थ रखने के लिए अपनी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखिए। क्योंकि जब स्वास्थ्य साथ होता है, तभी सपनों को पूरा करने की ताकत भी साथ होती है।
