भारत में आयोजित हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां अपने जोरों शोरों पर हैं। जहां भारत की मेजबानी में कई सारे वर्ल्ड लीडर्स भारत आ रहे हैं। जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन भी शामिल है। लेकिन व्लादमीर पुतिन के भारत आने से ठीक पहले रूस के तीन विशालकाय सैन्य विमानों ने भारत की धरती पर लैंडिंग की है। खास बात यह रही कि इन रूसी विमानों ने दिल्ली की जगह ग्रेटर नोएडा में बने नए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग की है और यह इस नए एयरपोर्ट के इतिहास की पहली विदेशी लैंडिंग भी बन गई है। 8 सितंबर की सुबह करीब 5:30 बजे रूसी वायुसेना से जुड़े हुए तीन बड़े सैन्य विमानों ने एक के बाद एक इस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। इनमें रूस का बहुचर्चित और ताकतवर सैन्य परिवहन विमान IL76 यानी कि एलजन 76 भी शामिल था।
इन विमानों के जरिए रूस की एडवांस सिक्योरिटी टीम, उच्च स्तरीय सैन्य अधिकारी और राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा जरूरी साजो सामान भारत पहुंचाया गया है। ये तीनों रूसी सैन्य विमान एयरपोर्ट के रनवे और एप्रिन क्षेत्र में पार्क रहे। इनकी सुरक्षा को लेकर जेवर एयरपोर्ट प्रशासन, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और रूसी तकनीकी सुरक्षा टीम मिलकर 24ों घंटे निगरानी रख रही थी। आमतौर पर विदेशी राष्ट्र अध्यक्ष और उनसे जुड़े हुए सैन्य उड़ानों के लिए दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जेवर एयरपोर्ट पर हुई यह लैंडिंग बताती है कि नया एयरपोर्ट अब बड़े और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अभियानों के लिए पूरी तरीके से तैयार है। यह पूरी हलचल नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से जुड़ी है जो कि 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडप में आयोजित होगी और इसमें ब्रिक्स देशों से जुड़े हुए तमाम बड़े नेता शामिल होंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। रूस और भारत के राजनीतिक संबंधों के लिहाज से पुतिन का दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
पुतिन की सुरक्षा का प्रोटोकॉल हमेशा से ही दुनिया में सबसे सख्त नेताओं में से एक माना जाता है और यही वजह है कि उनके आने के कुछ दिन पहले ही उनकी एडवांस टीम हर बारीकी का जायजा लेने भारत आई है और अपना सारा साजो सामान भी इन तीन विमानों में भरकर भारत पहुंची है। रूस के इन तीन सैन्य विमानों की नोएडा एयरपोर्ट पर लैंडिंग सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं है बल्कि भारत और रूस के बीच गहरे रणनीतिक तालमेल का सबूत भी है। साथ ही में नए जेवर एयरपोर्ट की क्षमता का भी यह बड़ा परीक्षण है। इतने बड़े आयोजन के बीच अगर उसका इस्तेमाल किया जा रहा है तो यह दिखाता है कि नोएडा के ये जो बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है बड़े-बड़े आयोजनों के लिए विकल्प बन सकता है। अब सबकी नजर टिकी है 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर और इसमें भी कि आखिर रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के भारत आने पर भारत और रूस के संबंधों में क्या कुछ नया देखने को मिलता है?
