ताइवान की सेना इस बात की तैयारी कर रही है कि अगर उसके ऊपर दो तरफ़ा हमले हुए तो वह कैसे जवाब देगी।अलग-अलग हथियारों के साथ हमला करने के लिए तैयार ताइवान की सेना किस तरह से अपने आप को युद्ध के लिए तैयार कर रही है। युद्ध में परखे जा चुके हिमरस रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल ताइवान की सेना कर रही है और इस अभ्यास में चीन की हमलावर सेना पर हमले का सिमुलेशन किया गया और यह दिखाया गया कि कैसे शूट एंड स्कूट यानी कि हमला करने के बाद तुरंत जगह बदल लेने की तकनीक के जवाबी हमले से भी बचा जा सकता है और युद्ध में टिके रहने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। ताइवान ने बीते साल पहली बार अपने पूर्वी तट पर लॉकेट मार्टिन द्वारा बनाए गए सटीक निशाना लगाने वाले हथियार हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम यानी कि हेमरस का परीक्षण किया और पहली बार इसे चीन के बिल्कुल सामने वाले पश्चिमी तट यानी मध्य ताइवान के ताईच से फायर किया गया। ताइवान की सरकार अपनी सेना को आधुनिक बना रही है और इसमें नए और आसानी से कहीं भी ले जाए जाने वाले हथियारों को शामिल किया जा रहा है।

साथ ही ट्रेनिंग को ऐसा बनाया जा रहा है जिसका पहले से अंदाजा ना लगाया जा सके और असल लड़ाई के हालात जैसे लगे। एचआईएमआरएस यूक्रेन के मुख्य हमलावरों सिस्टम में से एक है और रूस के साथ युद्ध के दौरान इसका कई बार इस्तेमाल हुआ है। लगभग 300 कि.मी. की रेंज वाला यह हथियार ताइवान जलडमरू मध्य के दूसरी और चीन के दक्षिणी प्रांत फूजियान में तटीय ठिकानों पर हमला कर सकता है। ताइवान के पश्चिमी तट पर मौजूद समुद्री तट और कीचड़ वाले इलाके जो ताइवान स्ट्रीट के पार सीधे चीन के सामने हैं उन्हें किसी भी हमले की स्थिति में चीनी सेना के उतरने की सबसे संभावित जगह मानी जाती है।

इस हथियार का इस्तेमाल ताइवान में ही बने थंडरब्ट 2000 लांचर से किया जाएगा। ताकि चीनी सेना को तब निशाना बनाया जा सके जब वह बंदरगाह से निकले या ताइवान के तट पर उतरने की कोशिश करें। जो ताइवान की सेना ने अभ्यास के पहले दिन थंडरब्ट फायर ही किया था और अपनी ताकत दुनिया को दिखाई कि किस तरह से वो चीन से मुकाबले के लिए तैयार है। चीन जो लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना इलाका मानता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now