दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को IB अधिकारी अंकित शर्मा मर्डर केस में उम्रकैद की सज़ा काट रहे जावेद की अपील पर नोटिस जारी किया। कड़कड़डूमा कोर्ट ने जावेद और ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें 31 जुलाई को सज़ा सुनाई थी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर अपील पर जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई नाज़िम और कासिम की दूसरी अपीलों के साथ 2 दिसंबर को होगी। 12 अगस्त को हाई कोर्ट ने नाज़िम और कासिम की उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने की अर्ज़ी पर नोटिस जारी किया था। दोषियों के वकील ने कहा कि पुलिस अपील करने वाले जावेद की भूमिका साबित करने में नाकाम रही।
अपील करने वाले नाज़िम और कासिम ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में हत्या और दूसरे अपराधों के लिए अपनी सज़ा और दोषसिद्धि को चुनौती दी है। दोषियों ने वकील बिलाल अनवर खान के ज़रिए अपनी अपील दायर की है। अपील करने वालों, जो सगे भाई हैं, की ओर से एक सीनियर वकील पेश हुए। यह कहा गया कि अपील करने वालों के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं था और न ही गवाहों ने उनके ख़िलाफ़ कोई पुष्टि की थी। इसके बावजूद, उन्हें सिर्फ़ बयानों के आधार पर दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई। 31 जुलाई को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन और 4 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। सज़ा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि यह अपराध बहुत ही घिनौना और बर्बर था, जिसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया। हत्या के बाद मृतक को जानवर की तरह घसीटा गया था।
कोर्ट ने कहा कि हालांकि, यह मामला ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ (रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर) मामलों की श्रेणी में नहीं आता है। अभियोजन पक्ष किसी भी दोषी की कोई खास भूमिका साबित नहीं कर सका। अभियोजन पक्ष ने अपराध के दौरान बरती गई बर्बरता का हवाला देते हुए सभी दोषियों के लिए मौत की सज़ा की मांग की थी। यह भी कहा गया कि अपराध को अंजाम देने के लिए भारी काटने वाले हथियार का इस्तेमाल किया गया था।
उन्हें अपहरण के अपराध के लिए भी 7 साल की सज़ा सुनाई गई और जुर्माना भी लगाया गया। उन्हें दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने आदि अपराधों के लिए भी सज़ा सुनाई गई।
