पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रविवार को भारत के साथ पिछले साल हुए संघर्ष को ‘‘दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई’’ करार दिया। मुनीर ने रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में ‘मारका-ए-हक’ की पहली सालगिरह के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए दावा किया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की रणनीति भारत की रणनीति से ‘श्रेष्ठ’ थी। पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा26 लोगों की हत्या किये जाने के जवाब में भारत ने छह-सात मई 2025 की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया और इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके)में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए।

इस कार्रवाई से तनाव में तेजी से वृद्धि हुई और पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकांश को भारतीय सेना ने विफल कर दिया। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच ‘हॉटलाइन’ पर हुई बातचीत के बाद 10 मई, 2025 को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। मुनीर ने रविवार के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भारत ने पिछले साल 6-7 मई की रात और 10 मई के बीच पाकिस्तान की ‘संप्रभुता और क्षेत्र का उल्लंघन’ किया और कहा कि पाकिस्तान ने ‘‘पूर्ण राष्ट्रीय एकता और सैन्य बल’’ के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मारका-ए-हक केवल दो देशों या सेनाओं के बीच लड़ा गया एक पारंपरिक युद्ध नहीं था, बल्कि वास्तव में यह दो विचारधाराओं के बीच एक निर्णायक मरका (लड़ाई) थी।’’ मुनीर ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने 26 ठिकानों पर हमले किए थे। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका के माध्यम से युद्धविराम की मांग की थी और पाकिस्तान ने ‘‘शांति के हित में’’ इस पर सहमति जताई थी। भारत पहले ही अमेरिका के किसी भी हस्तक्षेप का खंडन कर चुका है और उसका कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत में बनी थी।

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