ईरान ने अमेरिका की डील को ठुकरा दिया है। ट्रंप एक तरफ व्हाइट हाउस में मीटिंग कर रहे हैं और पत्रकारों से कह रहे हैं कि उनकी ईरान के साथ डील हो गई है। ईरान अमेरिका की सारी शर्तों को मानने पर राजी भी हो गया है। दूसरी तरफ ईरान ने साफ कह दिया है कि उसने अमेरिका की ना तो कोई शर्त मानी है और ना ही अमेरिका और ईरान की कोई डील हुई है। यानी कि हमले जरूर थम चुके हैं लेकिन युद्ध अभी तक थमा है या नहीं। इसको लेकर अभी भी कंफ्यूजन बाकी है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी सैनिकों का एक छोटा समूह कल ही ईरान में घुसकर पूरे ईरान पर कब्जा कर सकता है। साथ में यहां पर यह भी कहा गया है कि अगर मैं चाहूं तो यानी कि यह बात डॉनल्ड ट्रंप कह रहे हैं। एक और ईरान इंटरनेशनल इंग्लिश की खबर है।  इसमें ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका आज रात ईरान पर और भी बड़े हमले और शक्तिशाली बम हमले करेगा और कहा कि अमेरिका अभी भी तेहरान से बातचीत कर रहा है। लेकिन उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल व्यापार केंद्र खर्ग द्वीप पर कब्जा करना है। यानी कि ईरान में कब्जा करने और ईरान में जमीन पर सैनिक उतारने, बड़ा हमला करने की धमकी ट्रंप ने ईरान को एक रात पहले दे दी थी। कुछ ही घंटों के बाद भारत के समय के मुताबिक कहें तो रात से दिन हुआ और खबर ये आ गई कि डॉनल्ड ट्रंप ने अब हमला करने का जो अपना प्लान था वो टाल दिया है।

व्हाइट हाउस ने बयान जारी किया और कहा कि डॉन्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने ईरान पर अपने हमलों को रोक दिया है क्योंकि ईरान ने अमेरिका की डील को मान लिया है। स्वीकार कर लिया है। अमेरिका का दावा है और डॉनल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने अमेरिका की सारी शर्तों को मान लिया है जो ईरान के आगे उन्होंने रखी थी। इसमें ईरान के न्यूक्लियर हथियार एनरिच यूरेनियम से जुड़ी हुई शर्तें हैं जो ईरान ने मान ली है। ये अमेरिका का दावा है। लेकिन इसी दावे पर इसी खबर पर अब ईरान की ओर से जवाब आ चुका है। द हॉर्मोज लेटर के हवाले से खबर है जिसमें यह लिखा है कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस नए दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि ईरान में सर्वोच्च नेता समेत सभी ने समझौते को मंजूरी दे दी है। द होर्मुज लेटर के हवाले से एक खबर है जिसमें लिखा है कि मंत्रालय का कहना है कि किसी ने भी इस समझौते को स्वीकार नहीं किया है और कोई समझौता हुआ ही नहीं है। आगे कहा गया है कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को ईरान की सभी मांगों को मानना होगा जिसमें यह शर्त भी शामिल है कि वह समृद्ध यूरेनियम नहीं सौंपेगा या परमाणु रियायतें नहीं देगा। स्टेट ऑफ हॉर्मोस स्थाई रूप से ईरानी प्रबंधन के अधीन रहेगा और 24 अरब डॉलर जो उनकी रुकी हुई धनराशि है वह भी ईरान को दे दी जाएगी।

ईरान का कहना है कि अगर वह दबाव में झुकता तो वह एक साल पहले ही झुक गया होता ना कि लगातार अमेरिका की बमबारी के बाद। साथ ही ईरानी प्रवक्ता ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि समझौते पर साइन होने पर स्टेट ऑफ फॉर्मस फिर से खुल जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि यह ईरानी प्राधिकरण के अधीन आता है और बंद है और सुरक्षित आवागमन संभव नहीं है। आगे ईरान ने ट्रंप के इस नए दावे को भी खारिज किया है कि उन्होंने ईरान पर आज रात के हमलों को रद्द करने के लिए समझौता किया है। ईरान ने इसको बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं है और ट्रंप के सभी शब्दों को उसी तरीके से नजरअंदाज किया जाना चाहिए जैसे कि उन्होंने पिछले दो महीनों में 38 बार समझौते की घोषणा करी थी। तस्नीम न्यूज़ के मुताबिक एक वरिष्ठ इजरयली अधिकारी ने चैनल 12 को बताया कि उन्हें किसी भी समझौते के होने की जानकारी नहीं है। यह बात यह खबर अब ईरान की ओर से कही जा रही है कि उनके और अमेरिका के बीच कोई समझौता हुआ नहीं है और ना ही अमेरिका की जो डील है उस पर ईरान राजी हुआ है।

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