नॉर्थ कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन लगातार ताकत बढ़ाने में जुटा है। किम जोंग ने उन्नत बैलेस्टिक मिसाइल और लंबी दूरी की तोपों के परीक्षण का निरीक्षण किया। नॉर्थ कोरिया की सेना को और आक्रामक बनाने का निर्देश दिया। किम के फैसले से साउथ कोरिया और अमेरिका परेशान है। मिसाइलों की मजबूती को किम ज्यादा तरजीह दे रहा है। अभी दो दिन पहले नॉर्थ कोरिया का तानाशाह किम जो मिसाइल साइट पर पहुंचा था। उसने मिसाइल टेस्ट को तेज करने को कहा है। रिपोर्ट आ रही है कि किम ने मिसाइलों का साइट पर जाकर जो लेखा जोखा देखा उसको लेकर उसका मकसद एडवांस्ड मल्टी रॉकेट लॉन्च्ड सिस्टम वाली टेक्निकल बैलेस्टिक मिसाइल के लिए विशेष मिशन वाले हथियारों के क्षमता का मूल्यांकन करना था। जिनमें होवेजर तोप की लॉन्ग रेंज फायरिंग के साथ गोलाबारी की सटीकता हासिल करना था।
किम केवल मिसाइलों पर ही फोकस नहीं कर रहा बल्कि वह समंदर में भी अपनी ताकत को बढ़ा रहा है। किम जोंग हुन ने पश्चिमी बंदरगाह नापो में 5000 टन वाले नए डिस्ट्रॉयर चोहन को नौसेना में शामिल कर लिया है। इसे परमाणु हथियारों से लैस वॉरशिप बताया जा रहा है। चोए होन उन दो 5000 टन वजनी युद्धपोतों में से एक है जिसकी पहली लॉन्चिंग पिछले साल की गई थी। इस मौके पर किम जोंग के संदेश को बेहद अहम माना जा रहा है। किम जोंग ने कहा नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने का कार्यक्रम अपनी तय योजना के अनुसार सही ढंग से आगे बढ़ रहा है। यह बहुत अहम रणनीतिक कदम है क्योंकि इससे सेना को कई तरह के और असरदार ऑपरेशन के लिए तैयार रखना मुमकिन हो सकेगा। उत्तर कोरिया की तरफ से 5000 टन से बेहतर डिस्ट्रॉयर के निर्माण की बात कही जा रही है।
किम जोंग का कहना है कि जल्द ही बेहद ताकतवर डिस्ट्रयर कांगकोन को तैनात किया जाएगा। इसके बाद 10,000 टन के रणनीतिक युद्धपोत लांच किए जाएंगे। मार्च 2026 में इस जहाज से परमाणु क्षमता वाले क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी किया गया था। किम ने दावा किया कि नए हथियारों से उत्तर कोरिया के समुद्री संप्रभुता नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी है। गौर करने की बात यह है कि उत्तर कोरिया लगातार अपनी परमाणु ताकत में इजाफा कर रहा है। आखिर परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का फोकस क्यों है? उत्तर कोरिया ने दर्जनों परमाणु हथियार और उसे दागने वाली मिसाइलें विकसित की हैं। उत्तर कोरिया का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम मुख्य रूप से अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के खतरे से निपटने के लिए है। उत्तर कोरिया खुद को एक आधिकारिक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित कर चुका है और उसने अपने संविधान में भी इसका जिक्र किया है।
