प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों के बीच कोई भेदभाव नहीं होगा, चाहे वे उत्तर, दक्षिण, बड़े या छोटे हों। परिसीमन विधेयक पर विस्तार से बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने संकेत दिया कि इस प्रक्रिया का विरोध करने वाले लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह आश्वासन दिया कि कोई भेदभाव नहीं होगा, कोई अन्याय नहीं होगा। मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर चर्चा के लिए आयोजित संसद के विशेष सत्र के दौरान कहा कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ आश्वस्त करना चाहता हूं कि चाहे उत्तर हो या दक्षिण, इस प्रक्रिया में किसी तरह का भेदभाव या अन्याय नहीं होगा।

इसके साथ ही मोदी ने कहा कि मैं वादा कर सकता हूं और गारंटी दे सकता हूं; अगर आप गारंटी शब्द का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो मैं करूंगा, अगर आप वादा शब्द का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो मैं करूंगा। उन्होंने कहा कि भूतकाल में जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा, और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं… क्योंकि अगर नीयत साफ है, तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।

 

मोदी ने कहा कि हम उस अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं… जी नहीं! उसका हक ​है। हमने कई दशकों से रोका हुआ है। आज उसका प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी को कोई राजनीतिक फायदा नहीं होगा। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। जैसे ही ये पारित हो जाए, मैं कल विज्ञापन देकर सबका धन्यवाद करने को तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने को तैयार हूं। क्रेडिट आप ले लो… आपको जिसकी फोटो छपवानी है, मैं सरकारी खर्चे से छपवाने को तैयार हूं।

उन्होंने कहा कि देश में करीब 650+ जिला पंचायतें हैं। करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व करती हैं। एक कैबिनेट मीनिस्टर से ज्यादा जिम्मेदारी होती है उन पर, काम करती हैं वो। करीब 6,700 ब्लॉक पंचायतों में से करीब 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायतें ऐसी हैं, जिनका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में हैं। आज देश में 900+ शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में बहनें कार्यरत हैं। मैं मानता हूं, आज देश जो प्रगति कर रहा है, इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, इस ऋण को हमें स्वीकार करना चाहिए।

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