पत्रकार वार्ता में जानकारी देते एएसपी ज्ञान प्रकाश राय व पीछे खड़े गिरफ्तार आरोपित।
– कमीशन का झांसा देकर आधार-पैन, बैंक खाते और सिम लेते थे जालसाज
– फर्जी फर्में खड़ी कर बिलिंग और आईटीसी का खेल, मुख्य संचालक की तलाश तेज
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। जरूरतमंदों की मजबूरी को हथियार बनाकर करोड़ों रुपये का फर्जी जीएसटी कारोबार खड़ा करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बिंदकी कोतवाली क्षेत्र में सामने आए करीब 68 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी लेन-देन के मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य मामूली कमीशन का लालच देकर लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते, हस्ताक्षरित चेक और मोबाइल सिम हासिल करते थे। बाद में इन्हीं दस्तावेजों से शेल फर्में और बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग की जाती थी।
मामला राज्य कर विभाग की जांच के बाद पुलिस तक पहुंचा। जीएसटी विभाग में उपायुक्त कर के पद पर तैनात शैवालिनी सिंह की तहरीर पर थाना बिंदकी में मु0अ0सं0 111/2026 के तहत धारा 318(2) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि त्ै ज्तंकमते नामक फर्म के जरिए करीब 68 करोड़ रुपये का लेन-देन दर्शाया गया, जबकि फर्म का मौके पर वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला। फर्जी जीएसटी बिल और ई-वे बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने का खेल किए जाने के साक्ष्य पुलिस को मिले।
विवेचना के दौरान जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अरविंद श्रीवास्तव निवासी उन्नाव, विवेक शुक्ला उर्फ संजय शुक्ला निवासी कानपुर नगर और दीपू गुप्ता उर्फ संजीव कुमार गुप्ता निवासी कानपुर नगर को गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक विवेक शुक्ला और दीपू गुप्ता जरूरतमंद लोगों को हर महीने कमीशन देने का लालच देते थे। इसके बदले उनके जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेते थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल जेएसआर सेल्स समेत कई नामों से फर्जी फर्में और बैंक खाते खोलने में किया जाता था। खाते और फर्में कागजों पर दूसरे लोगों के नाम से होती थीं, लेकिन इनके पीछे पूरा नेटवर्क अलग लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था।
जांच में पुलिस को पता चला कि इन फर्जी फर्मों और बैंक खातों का वास्तविक संचालन संजय अग्रवाल उर्फ संजय लाला द्वारा किए जाने का आरोप है। इन्हीं माध्यमों से फर्जी जीएसटी बिलिंग और आईटीसी फ्रॉड को अंजाम दिया जाता था। इस अवैध कारोबार से मिलने वाली कमीशन की रकम संजय अग्रवाल से प्राप्त कर आरोपितों के बीच बांटी जाती थी।
अब पुलिस की जांच का फोकस कथित मुख्य संचालक संजय अग्रवाल उर्फ संजय लाला पर है। पुलिस उसके नेटवर्क, फर्जी फर्मों, बैंक खातों और इस पूरे खेल में शामिल अन्य लोगों के बारे में साक्ष्य जुटा रही है। इससे यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि 68 करोड़ रुपये के इस कथित फर्जी कारोबार का नेटवर्क जिले से बाहर तक कितना फैला हुआ है।
अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश राय ने पुलिस लाइन स्थित सम्मेलन कक्ष में पत्रकार वार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपितों के खिलाफ विधिक कार्रवाई पूरी कर उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों और अन्य संलिप्त लोगों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
