शिकायती पत्र देने के बाद खड़े शिकायतकर्ता।
फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे वर्षों तक सरकारी योजना का लाभ लेने का दावा, प्रशासन ने पेंशन रोकी और कार्ड निरस्त किए
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने के आरोपों से घिरे सुमित सिंह को लेकर अब सरकारी दिव्यांग पेंशन योजना में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि परिवार के कुछ सदस्यों के नाम पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार कराकर कई वर्षों तक पेंशन योजना का लाभ लिया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में अनियमितता सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित पेंशन पर रोक लगाने के साथ दिव्यांग कार्ड निरस्त कर दिए हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब 2 लाख 40 हजार रुपये की पेंशन का लाभ लिया गया। सरकारी योजना से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि पेंशन रोकने और प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और सरकारी धन का कथित लाभ लेने के मामले में अब तक आरोपी के खिलाफ किसी ठोस कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
नौकरी के नाम पर ठगी के पहले से आरोप
सुमित सिंह पर पहले से ही कई लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने के आरोप हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग समेत विभिन्न स्थानों पर संविदा नौकरी लगवाने का भरोसा देकर रकम ली गई, लेकिन नौकरी नहीं लग सकी। बताया जाता है कि इस संबंध में अलग-अलग थानों में आठ मुकदमे दर्ज हैं। इनमें थरियांव थाने में पांच, खागा कोतवाली में दो और मलवां थाने में एक मामला शामिल बताया जा रहा है।
प्रमाणपत्र जारी होने से लेकर सत्यापन तक उठे सवाल
दिव्यांग प्रमाणपत्रों को लेकर सामने आए आरोपों ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रमाणपत्र फर्जी थे तो वे जारी कैसे हुए और उनके आधार पर वर्षों तक पेंशन का भुगतान किस स्तर पर होता रहा, यह जांच का विषय है। प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की मांग उठ रही है।
अब मामला सामने आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और पुलिस इस कथित पेंशन फर्जीवाड़े में आगे क्या कार्रवाई करते हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी योजना के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी होगा।
