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फतेहपुर(CNF)। जनपद के बी पैक्स भिखारीपुर (किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड खंभापुर) में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को उसका वितरण नहीं किया जा रहा है। खरीफ के इस अत्यंत महत्वपूर्ण सीजन में जब किसानों को धान की रोपाई और नर्सरी के लिए खाद की सख्त जरूरत है, तब गोदाम में यूरिया और डीएपी डंप होने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण क्षेत्र में कृषि कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश और चिंता व्याप्त है।
इस पूरे संकट की जड़ में एक बेहद अजीबोगरीब विभागीय पेंच फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि समिति की पास (पीओएस) मशीन में कंप्यूटर ऑपरेटर के अंगूठे का निशान (बायोमेट्रिक) लॉक है, जिसके चलते ऑपरेटर की भौतिक उपस्थिति के बिना मशीन को चालू करना मुमकिन नहीं है। ऑपरेटर के ड्यूटी पर न आने के कारण मशीन बंद पड़ी है और खाद का वितरण रुका हुआ है। समिति के सचिव अशोक कुमार ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि उन्होंने ऑपरेटर को कई बार सूचना देकर बुलाने का प्रयास किया है, लेकिन वह जानबूझकर अनुपस्थित बना हुआ है। इस गंभीर समस्या से विभाग के उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है, पर अब तक कोई समाधान नहीं निकला। सूत्रों के अनुसार, इस गतिरोध के पीछे उक्त ऑपरेटर का रसूख और दोहरा फायदा उठाने की मंशा काम कर रही है। यह कंप्यूटर ऑपरेटर हाल ही में नवगठित एक अन्य बी-पैक्स में सचिव के रूप में पोस्ट हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद वह बी पैक्स भिखारीपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद का मोह छोड़ने को तैयार नहीं है। सचिव ने इस तानाशाही रवैये और नियम विरुद्ध आचरण के संदर्भ में एआरसीएस कार्यालय को कई बार पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की है। इसके बावजूद एआरसीएस कार्यालय की ओर से कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। गंभीर बात यह है कि भिखारीपुर जिला की इकलौती ऐसी समिति नहीं है जहां किसान इस तरह की मनमानी के शिकार हो रहे हैं। सहकारिता विभाग के सूत्रों का दावा है कि पूरे जनपद में वसूली बाबू गैंग के कई गुर्गे और सहकारी माफिया सक्रिय हैं, जो व्यवस्था को लगातार दीमक की तरह चाट रहे हैं। इस भ्रष्ट गिरोह और व्यवस्था को पंगु बनाने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई के लिए जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रभुदत्त दीक्षित ने शासन और सरकार स्तर पर कई बार सख्त लिखा-पढ़ी की है। इसके बावजूद इन रसूखदार गुर्गों पर अब तक कोई प्रभावी और दंडात्मक कार्रवाई न होना प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को उजागर करता है, जिसकी भारी कीमत क्षेत्र के गरीब किसानों को चुकानी पड़ रही है।
