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फतेहपुर(CNF)। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब द्वारा दिए गए समता, एकता, शांति, सहयोग और भाईचारे के संदेश को याद करते हुए तथा कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से जनपद में वर्ष 1978 से लगातार आयोजित होने वाली सालाना अशरये मजलिस का आयोजन इस वर्ष भी किया जाएगा।
यह जानकारी आयोजक किला रोड कर्बला के पास बाकरगंज के रहने वाले सैय्यद जौन असगर जैदी ने दी। उन्होने बताया कि इमाम हुसैन ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अत्याचार के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने यजीद की बैअत स्वीकार करने से इनकार करते हुए कर्बला के मैदान में अपने परिवार और साथियों सहित सर्वाेच्च बलिदान दिया। उनका यह बलिदान मानवता, धर्म, सत्य और इंसानियत की रक्षा का अमर संदेश देता है। बताया कि वर्ष 1978 से निरंतर आयोजित हो रही सालाना अशरये मजलिस का आयोजन इस बार 5 अगस्त से 14 अगस्त तक किया जाएगा। मजालिस का आयोजन आशूर खाना सैय्यदा नगरीस आरा बेगम किला रोड बाकरगंज में होगा। इस दौरान जनपद के बाहर से आने वाले मौलाना (धर्मगुरु) मजालिस को खिताब करेंगे और कर्बला की घटना पर प्रकाश डालेंगे। बताया कि इन मजलिसों का उद्देश्य इमाम हुसैन की कुर्बानी, इंसाफ, भाईचारे, सामाजिक एकता और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। आयोजक ने सभी अकीदतमंदों एवं इंसानियत से प्रेम रखने वाले लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर मजालिस में शामिल हों और इमाम हुसैन तथा उनके साथियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें।
