संपादकीय | सिटी न्यूज फतेहपुर
मेराज उद्दीन महताब
फतेहपुर हो या देश का कोई भी जिला, विकास की असली तस्वीर सरकारी फाइलों में नहीं बल्कि गांव, कस्बे और शहर की सड़कों पर दिखाई देती है। सरकारें योजनाएं बनाती हैं, बजट जारी होता है और अधिकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का दावा करते हैं। लेकिन जब उसी विकास कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित रह जाता है या किसी छोटे से काम के लिए आम नागरिक को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब भ्रष्टाचार का सवाल स्वाभाविक रूप से सामने आता है।

भ्रष्टाचार किसी एक विभाग की समस्या नहीं है। यह व्यवस्था के लिए दीमक की तरह है। शुरुआत छोटी अनियमितता से होती है और धीरे-धीरे यही प्रवृत्ति बड़ी गड़बड़ियों का रूप ले लेती है। सड़क निर्माण से लेकर सरकारी खरीद, विकास योजनाओं, प्रमाणपत्रों, जमीन से जुड़े मामलों और जनकल्याणकारी योजनाओं तक यदि पारदर्शिता नहीं होगी तो जनता के बीच सवाल उठना तय है।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब होती है जब गरीब और कमजोर व्यक्ति अपने अधिकार के लिए भी किसी की कृपा का मोहताज बन जाए। जिस सुविधा पर उसका कानूनी अधिकार है, उसके लिए यदि उसे सिफारिश या रिश्वत का सहारा लेना पड़े तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता भी है।

फतेहपुर जैसे जिले में विकास के लिए आने वाला प्रत्येक रुपया जनता की अमानत है। इस धन का इस्तेमाल सड़क, नाली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनसुविधाओं पर होना चाहिए। यदि कहीं गुणवत्ता से समझौता होता है, काम अधूरा छोड़ दिया जाता है या कागजों में काम पूरा दिखाया जाता है, तो उसकी जांच होना जरूरी है। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच से होना चाहिए—न कि शिकायतों को दबाकर।

यह भी सच है कि भ्रष्टाचार खत्म करने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं है। जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा। गलत तरीके से काम कराने के लिए रिश्वत देना बंद करना होगा। भ्रष्टाचार की जानकारी होने पर सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत करनी होगी। पत्रकारिता की भूमिका भी यहीं महत्वपूर्ण हो जाती है। मीडिया का काम किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े सवालों को सामने लाना और जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगना है।

प्रशासन यदि पारदर्शी तरीके से काम करे, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो, विकास कार्यों की गुणवत्ता की नियमित जांच हो और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई दिखाई दे, तो जनता का विश्वास मजबूत होगा।

आज जरूरत किसी एक व्यक्ति या विभाग को कटघरे में खड़ा करने से ज्यादा व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी जब शिकायत करने वाला नागरिक डरे नहीं, ईमानदार अधिकारी दबाव में न आए और गलत करने वाला कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के सामने जवाबदेह हो।

सवाल पूछना लोकतंत्र का अधिकार है और जवाब देना व्यवस्था की जिम्मेदारी।

फतेहपुर की जनता को विकास चाहिए, कागजों पर विकास की तस्वीर नहीं। जनता को पारदर्शिता चाहिए, आश्वासन नहीं। और सबसे बढ़कर उसे ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां किसी जायज काम के लिए किसी की जेब गर्म करने की जरूरत न पड़े।

भ्रष्टाचार के खिलाफ पहला कदम कार्रवाई नहीं, बल्कि चुप्पी तोड़ना है। अब समय है कि हर स्तर पर जवाबदेही तय हो।

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