अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप भी ट्रंप चुनाव के हारे इस कदर बौखला गए हैं। ना सिर्फ अपने दुश्मन देशों की कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं बल्कि ताबड़तोड़ तरीके से एक्शन भी ले रहे हैं। इसी कड़ी में डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर भारत से पंगा लेने की कोशिश कर दी है। भारत के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप की सरकार टूट पड़ी है और खबर यह आ रही है कि डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारत की नौ कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। उसके साथ ही एक व्यापारी और उसकी पत्नी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है और गंभीर आरोप ईरान से व्यापार करने को लेकर लगाए गए हैं। ट्रंप जैसे ही चुनाव हारे वैसे ना सिर्फ ईरान पर ताबड़तोड़ कारवाई शुरू की बल्कि भारत के खिलाफ भी शिकंजा कसना डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से शुरू कर दिया गया है। हालांकि भारत से पंगा लेना डोनाल्ड ट्रंप को और ज्यादा महंगा पड़ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप जानते हैं कि जब-जब उन्होंने भारत की तरफ आंख उठाने की कोशिश की है। भारत को नीचा गिराने या भारत को ठुकराने की कोशिश की है। तब-तब डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका को ही भारी नुकसान उठाना पड़ा है और खुद घुटनों के बल डोनाल्ड ट्रंप भारत के आगे सामने रिश्तों को सही करने के लिए आए हैं। अब ऐसे में मिड टर्म चुनाव में करारी हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर एक्शन लिया गया।
अमेरिकी वित्त विभाग ने एक भारतीय व्यवसायी, उनकी पत्नी और भारत में स्थित नौ व्यावसायिक कंपनियों पर सीधे प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए, ईरान को कच्चे तेल का अवैध निर्यात करने और समुद्री व्यापार जारी रखने में मदद की है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे एक संगठित और बड़े समुद्री आपराधिक नेटवर्क का नाम दिया है। सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी पर इस नेटवर्क को चलाने का आरोप है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय व्यवसायी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद को इस अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क का मुख्य संचालक और मास्टरमाइंड बताया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस दंपति ने तेल टैंकरों और जहाजों के लिए समुद्री पंजीकरण (मैरीटाइम रजिस्ट्रेशन) और फर्जी ‘फ्लैग रजिस्ट्री’ से जुड़े जाली दस्तावेज और प्रमाण पत्र तैयार किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि ईरानी तेल ले जाने वाले जहाज समुद्री नियमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए, बिना किसी रुकावट के वैश्विक जलक्षेत्र में अपना काम जारी रख सकें। ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत कार्रवाई, जिसका मकसद ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ना है। यह कड़ा कदम अमेरिकी सरकार के एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत उठाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य ईरान के पेट्रोलियम निर्यात और उससे जुड़ी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना है, ताकि तेहरान को तेल की बिक्री से होने वाली भारी कमाई से वंचित किया जा सके। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जो भी वैश्विक नेटवर्क फर्जी पहचान और शेल कंपनियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार नियमों का उल्लंघन करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
भारत स्थित 9 कंपनियों पर प्रतिबंधों का उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। इन कंपनियों को अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन, संपत्ति को फ्रीज करने और किसी भी प्रकार के व्यावसायिक सौदे करने से पूरी तरह रोक दिया गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण, इन कंपनियों और ऑपरेटरों के साथ लेनदेन करने वाले अंतरराष्ट्रीय बैंकों और समुद्री बीमा कंपनियों पर भी ‘सेकेंडरी प्रतिबंधों’ का खतरा मंडरा रहा है। इस कड़े कदम ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और तेल व्यापार से जुड़े भारतीय कारोबारी जगत में खलबली मचा दी है।
