युद्ध की दुनिया में एक कहावत है जिसके पास आग सबसे ज्यादा उसी का दबदबा सबसे ज्यादा होता है और अब चीन ने वही आग तैयार कर ली है जो आसमान से आती तबाही को भी बीच रास्ते में रोक सके। दावा है कि इंसानी इतिहास के सबसे ताकतवर मशीन गन अब चीन के हाथ लग चुकी है और कांसेप्ट जुड़ा है मेटल स्टॉर्म से। 1 मिनट में 45 लाख गोलियां, हर सेकंड 7500 राउंड और स्पीड इतनी कि सात मैग से तेज हाइपरसोनिक मिसाइल भी बुलेट वॉल में फंस सकती है। यानी अब हमला सिर्फ ऊपर से नहीं नीचे से जवाब भी उतना ही घातक मिलेगा। अमेरिका का फायरिंग सीआईडब्ल्यूएस 4500 राउंड प्रति मिनट फायर करता है। तो वहीं दूसरी तरफ चीन सीधा 100 गुना ज्यादा फायर पावर का दावा करता है। लेकिन इतनी ताकत के साथ आती है सबसे बड़ी चुनौती गोला और बारूद की। लाखों गोलियां हर मिनट भरना और लगभग नामुमकिन होता है। यही चीन ने सबसे बड़ा खेल कर दिया है।

बता दें कि डिस्पोजेबल बैरल सिस्टम उसने लगा दिया है और हर बैरल से पहले फायर करो और पूरा बैरल ही बदल दो। सबसे खतरनाक अपडेट है इलेक्ट्रॉनिक कांटेक्टस ट्रिगर ना कोई मैकेनिकल लिमिट है ना कोई स्पीड की रुकावट है। 17.5 माइक्रो सेकंड में फायरिंग यानी कि पलक झपकने से भी ज्यादा तेज। 1990 में ऑस्ट्रेलिया के माइक ओडव ने मेटल स्टॉम का सपना देखा था। 36 बैरल 10 लाख राउंड प्रति मिनट का टेस्ट और 2006 में चीन ने इसे टेक के लिए 100 बिलियन डॉलर का ऑफर भी दिया था। लेकिन अमेरिका इस बीच में कूद पड़ा था।

लेकिन टेक्निकल दिक्कतों की वजह से 2012 में प्रोजेक्ट खत्म हो गया था। लेकिन चीन फिर भी रुका नहीं। ताइवान के रिसर्चर्स, नई टेक्नोलॉजी, बॉक्स टाइप रोटरी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर और हाई स्पीड फायरिंग। अभी कांसेप्ट फिर से जिंदा हो चुका है। अब जरा सोचिए जब युद्ध में मिसाइलें आएंगी और सामने से गोलियों की दीवार खड़ी हो जाएगी तो लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं होगी, टेक्नोलॉजी की भी होगी।

 

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