रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर को पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आज़ादी तो मिली, लेकिन सांस्कृतिक आज़ादी नहीं। उन्होंने केरल के कोच्चि में तीन दिन तक चलने वाले कार्यक्रम ‘रामायण- वन एपिक मेनी स्टोरीज़: राम कथा अक्रॉस भारत एंड बियॉन्ड’ (रामायण – एक महाकाव्य, कई कहानियाँ: भारत और उसके बाहर राम कथा) के उद्घाटन समारोह में यह बात कही।

सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के विकास में न केवल आर्थिक तरक्की शामिल होनी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मज़बूत करना और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना भी ज़रूरी है। सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का आधुनिकीकरण उसकी सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘सर्व धर्म समभाव’ यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान हमेशा से हमारी सभ्यता की मूल भावना रही है। फिर भी, पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के कारण, हमारे धर्म को सांप्रदायिकता, परंपरा को पिछड़ापन, विश्वास को कट्टरता और आस्था को अंधविश्वास के रूप में पेश किया गया।

राजनाथ सिंह ने युवा पीढ़ी के बीच भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय चेतना मज़बूत होगी और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्होंने युवाओं से भारत के आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी बदलाव में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक आत्मविश्वासी, सक्षम और सामाजिक रूप से समावेशी भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

राम मंदिर के निर्माण में हुई देरी का ज़िक्र करते हुए सिंह ने पूछा कि आज़ादी के बाद कहा गया था कि भारत की खोई हुई संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन भगवान राम से बेहतर भारत की आत्मा का प्रतीक कौन हो सकता है? फिर आज़ादी के सात दशक बाद भी राम मंदिर बनने में इतना समय क्यों लगा? ऐसा तुष्टीकरण की नीति के कारण हुआ। यह सोच भारतीय नज़रिए के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने समय से पहले जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करके, देश में मुफ़्त कोविड-19 टीके उपलब्ध कराकर और 100 देशों को 30 करोड़ से ज़्यादा टीके भेजकर दुनिया के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

सिंह ने भारत के एक सभ्यतागत लीडर के तौर पर उभरने पर ज़ोर दिया। उन्होंने इसके लिए इंटरनेशनल योग डे के वैश्विक आयोजन और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों में भारत की लीडरशिप का ज़िक्र किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि दया की भावना से प्रेरित होकर सरकार ने लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए काम किया है और पिछले 10 से 12 सालों में 25 करोड़ से ज़्यादा लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी डेमोक्रेसी और कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के ज़रिए दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।

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