CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्र अयोध्या में रामलला मंदिर के दान और चंदे में कथित हेराफेरी का मामला इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। ठीक इसी तर्ज पर जनपद के ऐतिहासिक व आस्था के प्रमुख केंद्र तांबेश्वर महादेव मंदिर में भी दशकों से दान और चंदे की राशि में मची लूट और बंदरबांट का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त साक्ष्यों के मुताबिकए मंदिर की आस्था और श्रद्धालुओं के पैसे का व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए दुरुपयोग करने का यह खेल लंबे समय से पर्दे के पीछे चल रहा थाए जो अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
इस पूरे महाघोटाले का सबसे मुख्य और चैंकाने वाला पहलू मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सचिव ;दिवंगतद्ध ओम प्रकाश रस्तोगी की कार्यप्रणाली से जुड़ा है। आरोप है कि तात्कालिक समय में उन्होंने मंदिर के मूल खाते जो भारतीय स्टेट बैंकए प्रधान शाखा फतेहपुर में संचालित है से पहले 15 लाख और फिर 10 लाख की राशि अपने निजी खाते में ट्रांसफर कराई। इसके बादए मंदिर के इस कुल 25 लाख के कोष से अपने व्यक्तिगत नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद तैयार करवा ली। समय के साथ ब्याज जुड़ते.जुड़ते यह धनराशि आज के समय में लगभग सवा करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को छू चुकी है। मामला उजागर होने और चैतरफा दबाव बढ़ने के बादए मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबू राधेश्याम गुप्ता द्वारा दिवंगत रस्तोगी के परिजनों से इस राशि को पुनः मंदिर के आधिकारिक खाते में वापस लाने के तमाम प्रयास किए गएए लेकिन वे सभी अब तक सर्वथा नाकाफी साबित हुए हैं। सूत्रों के अनुसारए स्वर्गीय रस्तोगी के परिजन इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को लेकर पूरी तरह उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस धार्मिक न्यास में हो रही खुली लूट की शिकायतें शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों से कई बार की गईंए लेकिन हर बार मामले को दबाने का प्रयास किया गया। मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य रहे आचार्य विष्णु शुक्लए मंदिर के व्यवस्थापक दीप नारायण मिश्रा और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंह द्वारा समय.समय पर दिए गए लिखित साक्ष्यों और शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अमला कुंभकर्णी नींद सोता रहा। पूर्व के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो नवंबर 2024 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी न्यायिक को एक उच्च स्तरीय जांच सौंपी थी। परंतुए नौकरशाही के ढुलमुल रवैए के कारण उस जांच रिपोर्ट को भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गयाए जिससे आरोपियों के हौसले और बुलंद होते गए। इस गतिरोध के बीचए अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने एक बार फिर सूबे के मुखिया ;मुख्यमंत्रीद्ध को सीधे पत्र भेजकर तांबेश्वर महादेव मंदिर में करोड़ों रुपये के दान.चंदे की अनवरत लूट का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया है। उन्होंने अपने पत्र में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया। अधिवक्ता ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रकार अयोध्या के रामलला मंदिर में शुरुआत में चंदा चोरी के आरोपों को हल्के में लिया गया और बाद में मामला बढ़ने पर सरकार को एसआईटी जांच बैठानी पड़ीए ठीक वैसी ही स्थिति फतेहपुर के इस ऐतिहासिक मंदिर की भी हो रही है। यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन ने तांबेश्वर मंदिर ट्रस्ट के कर्ता.धर्ताओं और संलिप्त लोगों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कीए तो आने वाले दिनों में शासन.प्रशासन को बड़ी जन.फजीहत का सामना करना पड़ेगा। 8 वर्षों का वित्तीय ऑडिट और मूल खाते का रहस्य. मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में एक और अत्यंत गंभीर बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। आरोप है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से तांबेश्वर महादेव मंदिर के मूल बैंक खाते का नियमित और पारदर्शी संचालन नहीं किया जा रहा है। अधिवक्ता व स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग ने मांग की है कि पिछले आठ वर्षों के संपूर्ण दानए चंदे और चढ़ावे की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाएए ताकि आस्था के नाम पर अपनी जेबें भरने वाले सफेदपोशों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके और महादेव की संपत्ति को सुरक्षित किया जा सके।

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