ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सैनिकों की मौत से अमेरिका में बवाल मच चुका है। हाल ही में जॉर्डन के मुआफिक साल्ट एयरबेस पर ईरान ने एक विनाशकारी मिसाइल हमला किया था। इस हमले में अमेरिका की महज 19 साल के युवा प्राइवेट सैनिक ईसा बेला गोंजा लीस की दर्दनाक मौत हो गई। इसके साथ एक दूसरे सैनिक की भी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी में युद्ध अलग ही लेवल पर पहुंच गया, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी जनता के भीतर अपनी ही  सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा भड़क गया। लोग सोशल मीडिया पर तीखे सवाल पूछ रहे हैं कि इतनी भयानक और विनाशकारी युद्ध के मैदान में 19 साल के एक सैनिक को भेजना क्या अमेरिकी जनरलों की भारी मूर्खता नहीं थी? इस एक मौत ने वाशिंगटन की युद्ध नीति की धज्जियां उड़ा कर रख दी और इसी लाचारी को छुपाने के लिए अमेरिका भी एक नया खेल खेलने लगा।

 

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब जॉर्डन में ईरान के इन शुरुआती तीन हमलों ने अमेरिकी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया तब वाशिंगटन ने चुप्पी साध ली। आखिरकार सुपर पावर ने अपने सैनिकों पर हुए हमलों को दुनिया के सामने क्यों नहीं रखा? अमेरिकी अधिकारियों की दलील है कि हताहतों और नुकसान की जानकारी सार्वजनिक करने से ऑपरेशनल सिक्योरिटी पर बुरा असर पड़ सकता था। लेकिन रक्षा विशेषज्ञ ने इसे अमेरिकी कमजोरी और घबराहट करार दिया। दरअसल अमेरिका को डर था कि अगर उसने इन हमलों को स्वीकार किया तो उस पर जवाबी कार्रवाई करने का भारी दबाव बनेगा जो सीधे तौर पर ईरान के साथ एक बड़े और विनाशकारी युद्ध की शुरुआत कर सकता था। वाशिंगटन अपनी नाकामी छिपाने के लिए कूटनीति का सहारा ले रहा था। यह छिपा हुआ सच अब पूरी तरीके से आखिरकार बेनकाब हुआ।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े अमेरिकी सेंट्रल कमांड के हवाले से बताए गए हैं जो वाशिंगटन के दावों की धज्जियां उड़ा देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक जब से अमेरिका और इसराइल ने फरवरी मिनान पर हमले शुरू किए तब से अब तक खाड़ी क्षेत्र में कम से कम 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। यही नहीं इस भीषण संघर्ष में 400 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। ये आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के अभिद्ध किले को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। सुपर पावर अमेरिका अब अपने ही सहयोगियों के घर में लाचार और बेबस नजर आ रहा है। जहां उसके सैनिक ईरान के मिसाइल रडार पर खड़े हैं। पेंटगन ने शुक्रवार को जिस घातक हमले को स्वीकार किया वह महज एक ट्रेलर था। असली तबाही तो अमेरिका पहले ही झेल चुका था। मिडिल ईस्ट में अब एक ऐसे ही महायुद्ध की सुगबुगाहट नजर आ रही है। खाड़ी क्षेत्र में छिड़ा ईरान युद्ध पूरी तरीके से बेकाबू हो चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। दोनों ओर से हो रहे ताबड़तोड़ जवाईबी हमलों ने पूरी खाड़ी में बारूदी तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। एक तरफ ईरान की सेना और उसके विशेष सुरक्षा बल ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से भीषण हमले करने का दावा किया तो दूसरी तरफ अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान ने कल 20 जुलाई की रात को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now