समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक संस्था होने के नाते उन्हें “निष्पक्ष फैसले” लेने चाहिए और देश के लोकतांत्रिक ढांचे में अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ है, जिनके कामकाज पर सवाल उठे हैं। सिर्फ़ CJP ने ही आपत्ति नहीं जताई है; देश भर की राजनीतिक पार्टियों ने समय-समय पर आयोग पर सवाल उठाए हैं। एक संवैधानिक संस्था के तौर पर, निष्पक्ष फैसले लेना और लोकतांत्रिक ढांचे में अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी ज़िम्मेदारी है। अगर चुनाव आयुक्त के कामों के पीछे कोई साज़िश या चाल है, तो उसे भारतीय जनता पार्टी रच रही है। सिर्फ़ युवा ही इसके खिलाफ नहीं हैं; सभी राजनीतिक पार्टियां इस मांग पर एकजुट हैं कि चुनाव आयुक्त को निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

आज उन्होंने कहा कि राजधानी में एक बड़े प्रदर्शन के दौरान लोगों के विरोध को दबाने की सरकार की कोशिशें, सरकार की ही एक और बड़ी गलती साबित होंगी। एक्स पर एक पोस्ट में यादव ने कहा कि केंद्र सरकार की तमाम रुकावटों के बावजूद आज दिल्ली में युवा एकजुट होंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी की रुकावट से नहीं रुकेगा। अब देश दिल्ली में एकजुट होगा! हम देश के युवाओं की ऊर्जा के साथ खड़े हैं। अगर बीजेपी सरकार को लगता है कि वह सत्ता के दम पर लोगों को रोक सकती है, तो यह उसकी और भी बड़ी गलती साबित होगी। जंतर-मंतर अब सिर्फ़ एक जगह का नाम नहीं रह गया है; यह एक नई चेतना और जागृति का प्रतीक बन गया है। अगर सरकार प्रदर्शनकारियों को रोकती है, तो देश भर में हर जगह जंतर-मंतर बन जाएंगे।

इस बीच, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। ये लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।

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